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अपानवायु/Fart रोकने से होने वाला दुष्प्रभाव

अपानवायु, छींक, खाँसी आदि शारीरिक वेगों को नहीं रोकना चाहिये। आयुर्वेद में इन्हें रोकने का निषेध है। इन वेगों के रोकने से अनेक समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं । जिनमें से कुछ बहुत कष्टदायी भी […]

श्रीमद्भगवद्गीता का महात्म्य

श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीष्मपर्व का एक भाग है। इसकी गणना प्रस्थानत्रयी में होती है। प्रस्थानत्रयी के अंतर्गत – उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र एवं श्रीमद्भगवद्गीता की परिगणित हैं। मनुष्यमात्र के उद्धार के लिए ये तीन राजमार्ग हैं। उपनिषद् […]

ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा

“ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा” पतञ्जलि के योगसूत्र के समाधिपाद का एक सूत्र है। इसकी व्युत्पत्ति है ऋतं सत्यं बिभर्ति इति। भृञ् धातु में ऋत् उपसर्ग तथा खच् और टाप् प्रत्यय द्वारा यह शब्द निष्पन्न हुआ है। […]