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आदि शंकराचार्य विरचित “श्रीकृष्णाष्टकम्”

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनंस्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम्।सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकंअनङ्गरङ्गसागरं नमामि कृष्णनागरम्।। १।। मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनंविधूतगोपशोचनं नमामि[…]

विवर्तवाद

विवर्तवाद अद्वैतवेदान्त का कार्य-कारणवाद है। अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक आचार्य शंकर ने आकाशादि प्रपंचमय जगत् को कार्य एवं ब्रह्म को कारण कहा है। उन्होंने प्रपंचमय जगत् एवं कार्णरूप ब्रह्म मे अनन्यनत्व स्थापित किया है। परन्तु […]