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पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

नहि तद्विद्यते किञ्चिद्यदर्थेन न सिद्धयति। यत्नेन मतिमांस्तस्मादर्थमेकं प्रसाधयेत्।। पञ्चतन्त्र, मित्रभेद, 2 इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक […]