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खाँसी-जुकाम से मुक्ति का उपाय

आईये जानते हैं खाँसी-जुकाम से बचने और उसे ठीक करने के उपाय। वातावरण में परिवर्तन से प्रायः खाँसी-जुकाम होना सामान्य सी बात है । अनेक व्यक्तियों को बात-बात पर जुकाम होता है और तुरन्त ध्यान न दिये जाने पर बढ़ जाता है तथा कष्टकारी होता है । जुकाम अनेक बार […]

Satyanashi: सत्यानाशी के लाभ एवं हानि

सत्यानाशी का सामान्य परिचय हमारे परिवेश में बहुत से ऐसे बहुमूल्य औषधीय पौधे हैं जो खरपतवार के रूप में यत्र-तत्र दिख जाते हैं । इनको कोई बोता नहीं, सेवा नहीं करता। फिर भी उगते हैं, बढ़ते हैं । समय आने पर फूलते-फलते हैं । आयुर्वेद के जानकार इनके औषधीय गुणों […]

गुड़हल (Hibiscus) के औषधीय गुण

हम सभी के घर में या हमारे आसपास हमारे परिवेश में हमने लाल गुड़हल (hibiscus) अवश्य देखा होगा। हम इसे शोभाकारी पौधे के रूप में जानते हैं और इसके फूल मंदिर में देवी-देवता को चढ़ाये जाते हैं, ये बात जानते हैं। परन्तु हममें से बहुत लोग यह नहीं जानते होंगे […]

अंगूर – Grapes स्वास्थ्य के लिए उत्तम फल

अंगूर(द्राक्षा/दाख/Grapes) से हम सभी परिचित हैं। आज हम यह जानेंगे कि अंगूर के विषय में आयुर्वेद क्या कहता है? और यह स्वास्थ्य के लिये किस प्रकार लाभकारी है? अंगूर एक फल है। आयुर्वेद में इसकी गणना ‘फलवर्ग’ के अन्तर्गत होती है। अष्टांगहृदयम् में द्राक्षा अर्थात् अंगूर को फलों में उत्तम […]

काला तिल खायें: दाँत मजबूत बनायें

हम सभी जानते हैं कि तिल दो प्रकार का होता है काला तिल एवं सफेद तिल। तेल शब्द भी तिल शब्द से ही उत्पन्न हुआ है।आयुर्वेद के वाग्भट रचित ग्रंथ ‘अष्टांगहृदयम्‘ में काल तिल को दाँतों के लिए बहुत उपयोगी बताया गया है। अष्टांगहृदयम् में चरण संहिता, सश्रुतसंहिता सहित अन्य […]

अपानवायु/Fart रोकने से होने वाला दुष्प्रभाव

अपानवायु, छींक, खाँसी आदि शारीरिक वेगों को नहीं रोकना चाहिये। आयुर्वेद में इन्हें रोकने का निषेध है। इन वेगों के रोकने से अनेक समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं । जिनमें से कुछ बहुत कष्टदायी भी हो सकती हैं । अतः यह जानना आवश्यक है कि अपानवायु रोकने से क्या – […]

हरड़ /हरीतकी के लाभ

हरड़ का परिचय:- यह त्रिफला (हरड़, बहेड़ा व आँवला ) में से एक है। हरीतकी दो प्रकार की होती है। छोटी हरड़ और बड़ी हरड़। छोटी हरड़ वस्तुतः हरीतकी के अपरिपक्व फल हैं। बड़ी हरड़ परिपक्व फल को कहा जाता है। हरीतकी में नमक को छोड़कर मधुरादि पाँचों रस वर्तमान […]

पीपल का फल: विभिन्न रोगों में लाभकारी

पीपल एक बहुत ही प्रतिष्ठित, चिरपरिचित वृक्ष है। मैदान से लेकर पहाड़ तक हर जगह पाया जाता है । यह इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण ने कहा है- वृक्षाणां अश्वत्थोऽहं। अर्थात् वृक्षों में मैं पीपल हूँ । पीपल के फल के लाभ:- 1. शारीरिक कमजोरी/खून की कमीं […]

पौष्टिक गूलर: स्वास्थ्य के लिए वरदान

गूलर एक छायादार वृक्ष है। संस्कृत में इसे उदुम्बर कहते हैं। जिसमें वर्षभर फल आते रहते हैं। फूल कभी दिखाई नहीं पड़ता। इसीलिए न दिखाई पड़ने वाले और न होने वाले कार्य के लिए मुहावरा प्रसिद्ध है ‘गूलर का फूल’ । इसके फल के अंदर कुछ दिन बाद कीड़े पड़ […]

कुल्फा: एक पोषक शाक

कुल्फा को लोणी या लोनी भी कहते हैं क्योंकि यह स्वाद में हल्का खट्टा व नमकीन होता है। वसन्त के बाद ग्रीष्मकाल में यह अपने आप सूखी, परित्यक्त भूमि पर उग आता है। खरबूजे के खेत में या ग्रीष्म ऋतु में होने वाली भिंडी आदि किसी भी शाक-सब्जी के खेत […]