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देव्या आरात्रिकम्

प्रवरातीरनिवासिनि निगमप्रतिपाद्ये परावारविहारिणि नारायणि हृद्ये। प्रपञ्चसारे जगदाधारे श्रीविद्ये प्रपन्नपालननिरते मुनिवृन्दाराध्ये॥1॥ जय देवि जय देवि जय मोहनरूपे। मामिह जननि समुद्धर पतितं भवकूपे॥ ध्रुवपदम्॥ दिव्यसुधाकरवदने कुन्दोज्ज्वलरदने पदनखनिर्जितमदने मउकैटभकदने। विकसितपङ्कजनयने पन्नगपतिशयने खगपतिवहने गहने सङ्कटवनदहने॥ जय देवि जय देवि […]

भवान्यष्टकम्

न तातो न माता न बन्धुर्न दाता            न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता।न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव            गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥1॥ भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः            पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः।कुसंसारपाशप्रबद्धः संदाहं।            गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥2॥ […]