Tag: ज्योतिर्विद्

चन्द्रप्रज्ञप्ति

‘चन्द्रप्रज्ञप्ति’ ज्योतिष का प्राकृत भाषा में लिखा रचा गया एक ग्रंथ है। यह ‘सूर्यप्रज्ञप्ति’ की अपेक्षा परिष्कृत ग्रंथ है। इसमें बताया गया है कि चन्द्रमा अपने स्वयं के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है इसके […]

सूर्यप्रज्ञप्ति

सूर्यप्रज्ञप्ति भारतीय ज्योतिषशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसकी रचना प्राकृत भाषा में हुयी है और इसपर जैनविद्वान् मलयगिरि सूरि द्वारा रचित संस्कृत टीका प्राप्त होती है । इस ग्रंथ में सौरपरिवार और सूर्य की गति […]

वेदाङ्ग ज्योतिष

‘वेदाङ्ग ज्योतिष’ ज्योतिष का प्रारम्भिक और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। ज्योतिषशास्त्र आधिकारिक रूप से इसी ग्रन्थ के साथ अस्तित्व में आया। षडवेदाङ्ग वेदों के अंग को वेदाङ्ग कहा जाता है। वेदाङ्ग वैदिक ज्ञान के सम्यक् अवबोध […]