Tag: ज्ञान

न्याय-वैशेषिक में प्रमा

न्याय-वैशेषिक के ज्ञानमीमांसा की समस्त प्रक्रिया प्रमा (ज्ञान) पर ही आधारित है अतः प्रमा को विधिवत् जान लेना परमावश्यक है। ज्ञान किसी विषय का ही होता है। बिना किसी विषय के ज्ञान संभव नहीं । […]

न्याय-वैशेषिक में बुद्धि (ज्ञान) का स्वरूप

वैशेषिक दर्शन में सात पदार्थ हैं-द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय एवं अभाव। तत्र द्रव्यगुणकर्मसामान्यविशेषसमवायाभावाः सप्त पदार्थाः। इन सात पदार्थों में दूसरा पदार्थ है-गुण । गुण चौबीस है- रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, […]

श्रीमद्भगवद्गीता का महात्म्य

श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीष्मपर्व का एक भाग है। इसकी गणना प्रस्थानत्रयी में होती है। प्रस्थानत्रयी के अंतर्गत – उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र एवं श्रीमद्भगवद्गीता की परिगणित हैं। मनुष्यमात्र के उद्धार के लिए ये तीन राजमार्ग हैं। उपनिषद् […]

ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा

“ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा” पतञ्जलि के योगसूत्र के समाधिपाद का एक सूत्र है। इसकी व्युत्पत्ति है ऋतं सत्यं बिभर्ति इति। भृञ् धातु में ऋत् उपसर्ग तथा खच् और टाप् प्रत्यय द्वारा यह शब्द निष्पन्न हुआ है। […]