सहदेईया । सहदईया । सहदेई। सहदेवी। Vernonia cinerea का परिचय

हमारे आसपास बहुत से औषधीय पौधे हैं, जिनका परम्परागत रूप से रोग-व्याधि-चिकित्सा में हम उपयोग करते आये हैं। इनके चमत्कारिक प्रभाव को भी हम जानते हैं। इन पौधों और वनस्पतियों का आयुर्वेद में वर्णन भी प्राप्त होता है। ऐसा ही एक औषधीय पौधा है ‘सहदेईया/सहदेवी’। यह उस भूमि पर जो […]

आचार्य अभिनवगुप्त

आचार्य अभिनवगुप्त साहित्य के विद्यार्थियों और नाट्यशास्त्र के अध्येताओं के लिये एक सुपरिचित व्यक्तित्व हैं। आचार्य अभिनवगुप्त भरतमुनिप्रणीत नाट्यशास्त्र के टीकाकार, काव्यशास्त्रमर्मज्ञ और प्रमुख शैवाचार्य हैं। उन्होंने भारतीय काव्यशास्त्र के एक प्रमुख सिद्धान्त ’ध्वनिसिद्धान्त’ के आधारभूत ग्रन्थ ’ध्वन्यालोक’ पर लोचन नामक टीका की रचना की। ’ध्वन्यालोक’ आचार्य आनन्दवर्द्धन प्रणीत सिद्धान्तग्रन्थ […]

मकोय Black Nightshade भटकोइयां के औषधीय लाभ

  मकोय के लाभ  मकोय का पौधा हमारे परिवेश में सर्वत्र पाया जाता है। इसे संस्कृत में काकमाची कहते हैं। यह मकोइया और भटकैंया नाम से जाना जाता है। प्रायः यह अपने आप उगने वाला पौधा है। प्रायः पूरे वर्ष फूलता-फलता है। इसके फूल मिर्च की भाँति छोटे-छोटे होते हैं […]

आक/मदार/सफेद मदार/लाल मदार/मन्दार/अर्क/Calotropis gigantea

मदार का पुष्प और फल आशुतोष भगवान् शंकर को बहुत प्रिय है। इसके बिना उनकी पूजा अधूरी है। मदार को हम पूरे देश में यत्र-तत्र-सर्वत्र देख सकते हैं। सड़कों के किनारे, रेल की पटरियों के किनारे, कूड़े के पहाड़ों पर घूरों पर हर स्थान पर मदार खड़ा अपनी हरियाली बिखेरता […]

विषाणु संक्रमण : हमारा व्यवहार एवं सावधानी

आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी झेल रहा है। जीवन में गतिहीनता आ गयी है। चतुर्दिक् भय का वातावरण है। विश्व के समस्त देश कोरोना के संक्रमण से अपने नागरिकों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। आवागमन और परस्पर मेलजोल बाधित है।समय-समय पर मानव सभ्यता को महामारियों का सामना करना […]

परवल हृदय के लिए हितकारक

परवल (पटोल)/पटल) सभी स्थानों पर उपलब्ध एवं सर्वप्रिय शाक है। इसकी सब्जी प्रायः सभी घरों में बनती है। इसकी मिठाई भी बनायी जाती है। कुछ लोग परवल का रस भी सुपाच्य होंने के कारण पीते हैं। परवल का उपयोग तो हम सभी करते हैं परन्तु हममें से कुछ लोग ही […]

अष्टांगहृदयम्

अष्टांगहृदयम् आयुर्वेदाचार्य वाग्भट द्वारा विरचित आयुर्वेद-ग्रंथ है। यह ग्रंथ भारतीय आयुर्वेदशास्त्र के बृहतत्रयी के अन्तर्गत परिगणित होती है। वाग्भट ने अष्टांगहृदयम् के अतिरिक्त अष्टांगसंग्रह नामक एक अन्य आयुर्वेद ग्रंथ की रचना भी की। जो विद्वानों के मत में अष्टांगहृदयम् के पूर्व की रचना है। प्राचीन परम्परा में कतिपय उदाहरण ऐसे […]

जलवायु परिवर्तन और भारत

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् ।तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।।   “इस जगत् में जो कुछ है सब एक ही तत्त्व ईश्वर से व्याप्त है, अतः उनका त्याग के अनुसार भोग करें। अन्य किसी के धन आदि की इच्छा न रखें।“ कहने का तात्पर्य है कि जितने से आपकी मूलभूत […]

भावप्रकाश

आप वैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि, हिमालय आदि के द्वारा तैयार की गयी आयुर्वेदिक औषधियों में प्रायः देखते होंगे लिखा होता है – भावप्रकाश के आधार पर। अर्थात् वे औषधियाँ भावप्रकाश के अनुसार तैयार की गयी होती हैं। भावप्रकाश संस्कृत में लिखित आयुर्वेद का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इस ग्रंथ के […]