दालचीनी : स्वास्थ्य के लिए अमृत हमारी रसोईं से

  दालचीनी (Cinnamon) हमारे रसोईंघर में पाया जाने वाला मसाला है। जिसे हम गरम मसाले के रूप में प्रयोग करते हैं। छोला और उड़द की दाल में दालचीनी खड़े मसाले के रूप में प्रयोग में लायी जाती है। वस्तुतः ये एक वृक्ष की छाल है। इस प्रकार यह 100% प्राकृतिक […]

पीपल का फल: विभिन्न रोगों में लाभकारी

पीपल एक बहुत ही प्रतिष्ठित, चिरपरिचित वृक्ष है। मैदान से लेकर पहाड़ तक हर जगह पाया जाता है । यह इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् कृष्ण ने कहा है- वृक्षाणां अश्वत्थोऽहं। अर्थात् वृक्षों में मैं पीपल हूँ । पीपल के फल के लाभ:- 1. शारीरिक कमजोरी/खून की कमीं […]

कोविड-19: डिप्रेशन से कैसे बचें-दूसरों को भी बचाएँ

अवसाद (dipression) किसी को भी हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में कुछ बुरा ही हो तभी उसे तनाव और अवसाद हो। सबकुछ अच्छा चल रहा हो तब भी डिप्रेशन हो सकता है। हमारे देश में अभी भी अवसाद को बीमारी नहीं समझा जाता। मानसिक बीमारियों […]

पौष्टिक गूलर: स्वास्थ्य के लिए वरदान

गूलर एक छायादार वृक्ष है। संस्कृत में इसे उदुम्बर कहते हैं। जिसमें वर्षभर फल आते रहते हैं। फूल कभी दिखाई नहीं पड़ता। इसीलिए न दिखाई पड़ने वाले और न होने वाले कार्य के लिए मुहावरा प्रसिद्ध है ‘गूलर का फूल’ । इसके फल के अंदर कुछ दिन बाद कीड़े पड़ […]

कुल्फा: एक पोषक शाक

कुल्फा को लोणी या लोनी भी कहते हैं क्योंकि यह स्वाद में हल्का खट्टा व नमकीन होता है। वसन्त के बाद ग्रीष्मकाल में यह अपने आप सूखी, परित्यक्त भूमि पर उग आता है। खरबूजे के खेत में या ग्रीष्म ऋतु में होने वाली भिंडी आदि किसी भी शाक-सब्जी के खेत […]

लम्बे समय से आँखों में लालिमा एवं जलन (conjunctivitis) दूर करने हेतु का सरल उपचार

ग्रीष्म और शीत ऋतु में प्रायः आँखें धूप और ठंड के कारण लाल हो जाती है और उनमें खुजली, जलन व पीड़ा भी होने लगती है। कई बार चिकित्सक के पास जाने और सामान्य चिकित्सा से आँख स्वस्थ हो जाती है परन्तु कई बार सभी प्रकार की चिकित्सा के बाद […]

अजवाइन- गैस और उससे उत्पन्न पेटदर्द में रामबाण 

गैस बनना और उसके कारण पेटदर्द होना सामान्य बात है। प्रायः हर व्यक्ति को इसका सामना करना पड़ता है। अनेक बार गैस घंटों तक नहीं ठीक होती और पेटदर्द होता रहता है। ऐसे में डाॅक्टर गैस कम करने वाली कुछ दवायें लेने की सलाह देते हैं। ऐसी दवायें वे बहुत […]

आयुर्वेद के आठ अंग : विशद विवेचन

  भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के नाम से जानी जाती है। अथर्ववेद का एक उपवेद भी आयुर्वेद है। आचार्य चरक के अनुसार जिस शास्त्र में हित-आयु, अहित-आयु, सुख-आयु, दुःख-आयु का वर्णन प्राप्त हो एवं आयु के हित-अहित के लिये आहार-विहार तथा औषधियों का वर्णन किया गया हो और आयु के […]

सत्कार्यवाद–Satkaryvad

मनुष्य प्रारंभ से ही सृष्टि की उत्पत्ति का कारण एवं जीवन का सत्य जानने के लिए उत्सुक रहा है। जिज्ञासु रहा है। उसकी इसी जिज्ञासावृत्ति ने विभिन्न दर्शनधाराओं का सूत्रपात किया। जब किस तत्त्व के विषय में चिन्तन की एक परम्परा चल पड़ती है तो वह सिद्धान्त बन जाता है। […]

महुआ/मधूक: फूल और कोलँइदी/कोंयदी

बाजार में सबकुछ बारहों माह सहज ही उपलब्ध होंने से लोकजीवन के परम्परागत खाद्य शनैः-शनैः विस्मृत होते जा रहे हैं। खाद्य-संस्कृति की बढ़ती एकरसता ने जिह्वा से लोक में सहज उपलब्ध खाद्यों, विभिन्न प्रकार के शाकों, फलों एवं अन्नों का स्वाद छीन लिया है। आज स्थिति यह है कि आम […]