असत्कार्यवाद-Asatkaryvad

न्याय-वैशेषिक     के कार्य-कारण सिद्धान्त को असत्कार्यवाद के नाम से जाना जाता है । अत्सकार्यवादी कार्य को असत् मानते हैं अर्थात् कार्य का अपने उत्पत्ति से पूर्व अस्तित्व नहीं मानते। न्याय-वैशेषिक का मानना है कि कार्य पहले असत् है। अर्थात् अविद्यमान है, उसका अस्तित्व नहीं है। निमित्त कारण के क्रिया […]

दूसरे राज्यों में फंसे लोगों के लिए चलेंगी स्पेशल ट्रेन

  कोरोना से संबंधित ताजा ख़बरों के लिए क्लिक करें  कृपया ध्यान दें अगर आप नीचे दिए गए राज्यों से UP आना चाहते हैं तो नीचे दिए राज्यों के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं. धीरे धीरे अन्य राज्यों का लिंक भी आएगा प्रवासी रजिस्ट्रेशन। 3 मई शाम 8 बजे तक […]

मल: पुरीष रोकने से होने वाली समस्यायें

शरीर के आवश्यक और स्वाभाविक वेगों को नहीं रोकना चाहिये। आयुर्वेद इन वेगों को रोकने का निषेध करता है । परन्तु व्यक्ति देश-काल-परिस्थिति के अनुसार इन वेगों को कभी न कभी रोकता ही है।कुछ लोगों का तो स्वभाव ही बन जाता है रोकना। सामाजिक रूढ़ियाँ भी इसमें अपनी भूमिका निभाती […]

अपानवायु/Fart रोकने से होने वाला दुष्प्रभाव

अपानवायु, छींक, खाँसी आदि शारीरिक वेगों को नहीं रोकना चाहिये। आयुर्वेद में इन्हें रोकने का निषेध है। इन वेगों के रोकने से अनेक समस्यायें उत्पन्न हो सकती हैं । जिनमें से कुछ बहुत कष्टदायी भी हो सकती हैं । अतः यह जानना आवश्यक है कि अपानवायु रोकने से क्या – […]

बड़हल/बड़हर खाने में सावधानी

बड़हर (लकुच) एक फल है। जिसका अचार भी बनाया जाता है। अष्टांगहृदयम् के अनुसार बड़हर का फल अधम गुणों वाला होता है तथा यह वात-पित्त-कफ आदि सभी दोषों को उभारने वाला होता है। –“फलानामवरं तत्र लकुचं सर्वदोषकृत्” 👉बड़हर के फल को उड़द की दाल, गुड़, दूध, दही तथा घी के […]

चेहरे की झाईं कैसे दूर करें

झाईं होने का कारण एवं लक्षण:- चिड़चिड़ापन, शोक एवं क्रोध के कारण उभरे वात-पित्त दोषों के प्रकोप से मुखमंडल पर साँवला चकत्ता पड़ जाता है। उसी को झाईं कहते हैं। आयुर्वेद में इसे ‘व्यङ्ग’ कहते हैं। – शोकक्रोधादिकुपिताद्वातपित्तान्मुखे तनु।श्यामलं मण्डलं व्यङ्गं, वक्त्रादन्यत्र नीलिका।।परुषं परुषस्पर्शं व्यङ्गं श्यावं च मारुतात्।पित्तात्ताम्रान्तमानीलं, श्वेतान्तं कण्डुमत्कफात्।।रक्ताद्रक्तान्तमाताम्र […]

लहसुन की खीर बनाने की विधि: टीबी, टाइफाइड और सायटिका में रामबाण

लहसुन की खीर दूर करे टीबी, सायटिका, हृदयरोग, विद्रधि (abscess) तथा विषम ज्वर:- लहसुन खीर बनाने की विधि:- 100ग्राम छिला तथा सुखाया हुआ लहसुन लें उसे आठ गुने अर्थात् 800ग्राम पानी और आठ गुने अर्थात् 800 ग्राम दूध को एकसाथ मिलाकर, उसमें डालकर पकाएं। जब पूरा पानी अर्थात् 800ग्राम पानी […]

हरड़ /हरीतकी के लाभ

हरड़ का परिचय:- यह त्रिफला (हरड़, बहेड़ा व आँवला ) में से एक है। हरीतकी दो प्रकार की होती है। छोटी हरड़ और बड़ी हरड़। छोटी हरड़ वस्तुतः हरीतकी के अपरिपक्व फल हैं। बड़ी हरड़ परिपक्व फल को कहा जाता है। हरीतकी में नमक को छोड़कर मधुरादि पाँचों रस वर्तमान […]

इन वेगों को रोकना हो सकता है घातक

शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न वेगों को न रोकें ऐसा आयुर्वेद बार-बार कहता है।फिर भी लोग किसी न किसी कारण से उन वेगों को रोकते हैं और गंभीर बीमारियों को उत्पन्न होने का रास्ता साफ करते हैं ।आज यह जानना आवश्यक है कि आयुर्वेद के अनुसार किन-किन शारीरिक वेगों […]

शोभांजन (सहजन) खायें: स्वस्थ बनें

  👉यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो सहजन को भोजन में शामिल करें।👉यदि आप कैल्शियम की कमीं का सामना कर रहे हैं तो सहजन का सेवन करें।👉यदि आप रक्ताल्पता (एनीमिया)से पीड़ित हैं तो खून की कमी दूर करने के लिए सहजन खायें।👉यदि आपको पाचन संबंधी समस्या रहती है […]