हरिदास सिद्धान्तवागीश

हरिदास सिद्धान्तवागीश संस्कृत के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने घोर परतन्त्रताकाल में अपनी लेखनी द्वारा स्वातन्त्र्य की दुन्दुभि बजाये रखा। उनकी रचनाएं वीररस एवं ओजगुण से परिपूर्ण हैं। इसीलिये बीसवीं शती के संस्कृत रचनाकारों में उनका […]

मशीनी अनुवाद के सैद्धान्तिक आधार (Theoretical Concepts of Machine Translation)

मशीनी अनुवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य किसी एक भाषा में लिखित सामग्री अथवा कही गयी बात का किसी दूसरी भाषा में प्रस्तुति अनुवाद है। विश्व में अनेक भाषायें बोली जाती हैं और अनेक भाषाओं का समृद्ध […]

आयुर्वेद में तुलसी के गुण

तुलसी का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। तुलसी देवी के रूप में घर-घर पूज्य हैं। यही कारण है कि एक हिन्दू गृहस्थ के घर में तुलसी की अनिवार्य उपस्थिति होती है। तुलसी को […]

जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन धावत, हरि ब्रह्मा शिव जी।जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। मांग सिंदूर विराजत टीको मृग मद को।उज्जवल से देउ नैना, चंद्रवदन नीको।जय अम्बे गौरी, मैया जय […]

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो।न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः।न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनंपरं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥1॥ विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतयाविधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवेकुपुत्रो जायेत क्वचिदपि […]

चन्द्रप्रज्ञप्ति

‘चन्द्रप्रज्ञप्ति’ ज्योतिष का प्राकृत भाषा में लिखा रचा गया एक ग्रंथ है। यह ‘सूर्यप्रज्ञप्ति’ की अपेक्षा परिष्कृत ग्रंथ है। इसमें बताया गया है कि चन्द्रमा अपने स्वयं के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है इसके […]

सूर्यप्रज्ञप्ति

सूर्यप्रज्ञप्ति भारतीय ज्योतिषशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसकी रचना प्राकृत भाषा में हुयी है और इसपर जैनविद्वान् मलयगिरि सूरि द्वारा रचित संस्कृत टीका प्राप्त होती है । इस ग्रंथ में सौरपरिवार और सूर्य की गति […]

वेदाङ्ग ज्योतिष

‘वेदाङ्ग ज्योतिष’ ज्योतिष का प्रारम्भिक और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। ज्योतिषशास्त्र आधिकारिक रूप से इसी ग्रन्थ के साथ अस्तित्व में आया। षडवेदाङ्ग वेदों के अंग को वेदाङ्ग कहा जाता है। वेदाङ्ग वैदिक ज्ञान के सम्यक् अवबोध […]

अशोक के प्रमुख शिलालेख एवं उनमें वर्णित विषय

अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बांटा जा सकता है –1- शिलालेख2-स्तंभलेख3-गुहालेख।अशोक के शिलालेखों संख्या- 14 है। शिलालेख पहला – इसमें पशुबलि की निंदा की गई।दूसरा – मनुष्य व पशु दोनों की चिकित्सा – […]

पंचायती राज संबंधी महत्त्वपूर्ण समितियां

बलवंत राय मेहता समिति – 1957 बी आर राव समिति – 1960 आर आर दिवाकर समिति – 1963 के संथानम समिति – 1963 जी रामचंद्रन समिति – 1966 अशोक मेहता समिति – 1977 दांतेवाला समिति […]