भवान्यष्टकम्

न तातो न माता न बन्धुर्न दाता            न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता।न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव            गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥1॥ भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः            पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः।कुसंसारपाशप्रबद्धः संदाहं।            गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥2॥ […]

भाषाओं का मानवकृत अनुवाद बनाम मशीनी अनुवाद
(Human vs Computer Translation of Languages)

अनुवाद अनुवाद एक भाषा में लिखित अथवा कही गयी सामग्री का दूसरी भाषा में प्रस्तुति है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति जिस भाषा को नहीं जानता है उसमें कही अथवा लिखी गयी बातों को […]

आयुर्वेद के अनुसार कूष्माण्ड (कोंहड़ा/कुम्हड़ा/कद्दू/ सीताफल/ Pumpkin) के गुण

कूष्माण्ड/ कद्दू: एक परिचय कूष्माण्ड (कद्दू) एक ऐसा हरा शाक (सब्जी) है जो अनेक रूपों में विविधप्रकार से सेवन किया जाता है। कद्दू की लता का अग्रभाग, पुष्प, कच्चाफल, पकाफल तथा बीज का सेवन किया […]

कफदोष कैसे और कब उत्पन्न होता है?

सामान्यतः लोक में मान्यता है कि ठंड लगने से, मौसम बदलने से, कुसमय सोने-जागने, दिनचर्या में परिवर्तन, ठंडे व खट्टे पदार्थों के सेवन से, गर्मी से आकर तुरन्त स्नान करने से, कुसमय स्नान से तथा […]

हरिदास सिद्धान्तवागीश

हरिदास सिद्धान्तवागीश संस्कृत के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने घोर परतन्त्रताकाल में अपनी लेखनी द्वारा स्वातन्त्र्य की दुन्दुभि बजाये रखा। उनकी रचनाएं वीररस एवं ओजगुण से परिपूर्ण हैं। इसीलिये बीसवीं शती के संस्कृत रचनाकारों में उनका […]

मशीनी अनुवाद के सैद्धान्तिक आधार (Theoretical Concepts of Machine Translation)

मशीनी अनुवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य किसी एक भाषा में लिखित सामग्री अथवा कही गयी बात का किसी दूसरी भाषा में प्रस्तुति अनुवाद है। विश्व में अनेक भाषायें बोली जाती हैं और अनेक भाषाओं का समृद्ध […]

आयुर्वेद में तुलसी के गुण

तुलसी का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। तुलसी देवी के रूप में घर-घर पूज्य हैं। यही कारण है कि एक हिन्दू गृहस्थ के घर में तुलसी की अनिवार्य उपस्थिति होती है। तुलसी को […]

जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन धावत, हरि ब्रह्मा शिव जी।जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। मांग सिंदूर विराजत टीको मृग मद को।उज्जवल से देउ नैना, चंद्रवदन नीको।जय अम्बे गौरी, मैया जय […]

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो।न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः।न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनंपरं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥1॥ विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतयाविधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवेकुपुत्रो जायेत क्वचिदपि […]

चन्द्रप्रज्ञप्ति

‘चन्द्रप्रज्ञप्ति’ ज्योतिष का प्राकृत भाषा में लिखा रचा गया एक ग्रंथ है। यह ‘सूर्यप्रज्ञप्ति’ की अपेक्षा परिष्कृत ग्रंथ है। इसमें बताया गया है कि चन्द्रमा अपने स्वयं के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है इसके […]