महुआ/मधूक: फूल और कोलँइदी/कोंयदी

बाजार में सबकुछ बारहों माह सहज ही उपलब्ध होंने से लोकजीवन के परम्परागत खाद्य शनैः-शनैः विस्मृत होते जा रहे हैं। खाद्य-संस्कृति की बढ़ती एकरसता ने जिह्वा से लोक में सहज उपलब्ध खाद्यों, विभिन्न प्रकार के […]

फरेंद/गुलरहा फरेंद/राजजम्बू/फलेन्द्रा/जामुन

आर्द्रा के बरसने के बाद फरेंद/जामुन पकने लगी। एक समय था जब सड़क के दोनों किनारों पर जामुन के विशाल वृक्ष पंक्तिबद्ध खड़े रहते थे और जब जामुन पकती थी तो कपड़ों पर टपककर उसे […]

रामायण काकावीन: इण्डोनेशिया की रामकथा

रामायण काकावीन: परिचय  इण्डोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित विशाल देश है। यह विश्व चौथी बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके साथ ही य यह सबसे बड़ा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश भी है। इस देश में […]

विवर्तवाद

विवर्तवाद अद्वैतवेदान्त का कार्य-कारणवाद है। अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक आचार्य शंकर ने आकाशादि प्रपंचमय जगत् को कार्य एवं ब्रह्म को कारण कहा है। उन्होंने प्रपंचमय जगत् एवं कार्णरूप ब्रह्म मे अनन्यनत्व स्थापित किया है। परन्तु […]

परिणामवाद

परिणामवाद वस्तुतः सत्कार्यवाद का ही एक प्रकार है। सांख्य दर्शन का सत्कार्यवाद को परिणामवाद कहते हैं। ये कार्य को नवीन न मानकर परिणाम मानते हैं। सांख्य-योग का परिणामवाद प्रकृति-परिणामवाद कहलाता है। इसमें विश्व को प्रकृति […]

न्यायदर्शन के प्रमुख आचार्य एवं उनके ग्रंथ : समग्र संकलन

न्यायदर्शन के प्रवर्तक अक्षपाद गौतम हैं। इनके दो नाम ज्ञात होते हैं अक्षपाद एवं गौतम। अनेक स्थानों पर गोतम भी प्राप्त होता है। अधिकांश विद्वान् अक्षपाद एवं गौतम दोनों को एक ही व्यक्ति मानते हैं […]

षड्विधसन्निकर्ष

तर्कसंग्रह में अन्नमभट्ट ने न्यायदर्शन के अनुसार चार प्रमाण स्वीकार किये हैं – प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द।इन्द्रियार्थसन्निकर्ष का प्रसंग प्रत्यक्ष प्रमाण के अंतर्गत आता है। प्रत्यक्ष का लक्षण करते हुये अन्नमभट्ट लिखते हैं कि –तत्र […]

बदलती ग्रामीण संस्कृति: मरणासन्न जलाशय

वैदिक ऋषि प्रकृति के कण-कण में देवत्व मानकर सविता, सूर्य, उषा, अग्नि, वरुण, पृथ्वी, एवं सोम आदि देवताओं की स्तुति करते थे, उनके निमित्त यज्ञ करते थे। उन्होंने पृथ्वी से आकाश तक सभी तत्वों को […]

अकबर के काल में अनूदित महाभारत/रज़्मनामा

मुगल शासनकाल में अनेक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया। इसी क्रम में एक सहस्र श्लोकों वाले शतसाहस्री संहिता महाभारत का भी फारसी में ‘रज़्मनामा‘ नाम से अनुवाद हुआ। महाभारत के […]

अकबर के काल में अनूदित रामायण – फारसी रामायण-चित्रित रामायण

 अकबर के काल में अनूदित रामायण भारत में मुसलमान शासकों का अंतिम वंश मुगल है जिसने शासन किया। मुगल शासनकाल में भारतीय चित्रकला के इतिहास में मुगल कला शैली, मुगल चित्रकला शैली का विकास हुआ। […]