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शोभांजन (सहजन) खायें: स्वस्थ बनें

  👉यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो सहजन को भोजन में शामिल करें।👉यदि आप कैल्शियम की कमीं का सामना कर रहे हैं तो सहजन का सेवन करें।👉यदि आप रक्ताल्पता (एनीमिया)से पीड़ित हैं तो […]

दालचीनी : स्वास्थ्य के लिए अमृत हमारी रसोईं से

  दालचीनी (Cinnamon) हमारे रसोईंघर में पाया जाने वाला मसाला है। जिसे हम गरम मसाले के रूप में प्रयोग करते हैं। छोला और उड़द की दाल में दालचीनी खड़े मसाले के रूप में प्रयोग में […]

कोविड-19: डिप्रेशन से कैसे बचें-दूसरों को भी बचाएँ

अवसाद (dipression) किसी को भी हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में कुछ बुरा ही हो तभी उसे तनाव और अवसाद हो। सबकुछ अच्छा चल रहा हो तब भी डिप्रेशन हो […]

अजवाइन- गैस और उससे उत्पन्न पेटदर्द में रामबाण 

गैस बनना और उसके कारण पेटदर्द होना सामान्य बात है। प्रायः हर व्यक्ति को इसका सामना करना पड़ता है। अनेक बार गैस घंटों तक नहीं ठीक होती और पेटदर्द होता रहता है। ऐसे में डाॅक्टर […]

महुआ/मधूक: फूल और कोलँइदी/कोंयदी

बाजार में सबकुछ बारहों माह सहज ही उपलब्ध होंने से लोकजीवन के परम्परागत खाद्य शनैः-शनैः विस्मृत होते जा रहे हैं। खाद्य-संस्कृति की बढ़ती एकरसता ने जिह्वा से लोक में सहज उपलब्ध खाद्यों, विभिन्न प्रकार के […]

फरेंद/गुलरहा फरेंद/राजजम्बू/फलेन्द्रा/जामुन

आर्द्रा के बरसने के बाद फरेंद/जामुन पकने लगी। एक समय था जब सड़क के दोनों किनारों पर जामुन के विशाल वृक्ष पंक्तिबद्ध खड़े रहते थे और जब जामुन पकती थी तो कपड़ों पर टपककर उसे […]

रामायण काकावीन: इण्डोनेशिया की रामकथा

रामायण काकावीन: परिचय  इण्डोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित विशाल देश है। यह विश्व चौथी बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके साथ ही य यह सबसे बड़ा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश भी है। इस देश में […]

विवर्तवाद

विवर्तवाद अद्वैतवेदान्त का कार्य-कारणवाद है। अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक आचार्य शंकर ने आकाशादि प्रपंचमय जगत् को कार्य एवं ब्रह्म को कारण कहा है। उन्होंने प्रपंचमय जगत् एवं कार्णरूप ब्रह्म मे अनन्यनत्व स्थापित किया है। परन्तु […]

न्यायदर्शन के प्रमुख आचार्य एवं उनके ग्रंथ : समग्र संकलन

न्यायदर्शन के प्रवर्तक अक्षपाद गौतम हैं। इनके दो नाम ज्ञात होते हैं अक्षपाद एवं गौतम। अनेक स्थानों पर गोतम भी प्राप्त होता है। अधिकांश विद्वान् अक्षपाद एवं गौतम दोनों को एक ही व्यक्ति मानते हैं […]

बदलती ग्रामीण संस्कृति: मरणासन्न जलाशय

  वैदिक ऋषि प्रकृति के कण-कण में देवत्व मानकर सविता, सूर्य, उषा, अग्नि, वरुण, पृथ्वी, एवं सोम आदि देवताओं की स्तुति करते थे, उनके निमित्त यज्ञ करते थे। उन्होंने पृथ्वी से आकाश तक सभी तत्वों […]