साहित्य

पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

नहि तद्विद्यते किञ्चिद्यदर्थेन न सिद्धयति। यत्नेन मतिमांस्तस्मादर्थमेकं प्रसाधयेत्।। पञ्चतन्त्र, मित्रभेद, 2 इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक धन का ही उपार्जन करना चाहिए । धन से ही समस्त वैभव और इच्छित वस्तुओं […]

शुकसप्तति । Shuksaptati katha

शुकसप्तति एक मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवं उपदेशात्मक कथासंग्रह है। इसकी भाषा संस्कृत है। प्राकृत में भी इसके श्लोक प्राप्त होते हैं । यह गद्य-पद्यात्मक रचना है। ऐसा माना जाता है कि परम्परा के प्रवाह में एक ग्रंथ के रूप में आने से पूर्व ही शुकसप्तति की कथायें लोक में प्रचलित थीं […]

अकबर के काल में अनूदित महाभारत/रज़्मनामा

मुगल शासनकाल में अनेक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया। इसी क्रम में एक सहस्र श्लोकों वाले शतसाहस्री संहिता महाभारत का भी फारसी में ‘रज़्मनामा‘ नाम से अनुवाद हुआ। महाभारत के अनुवाद के बाद जब अकबर के पास अनूदित पुस्तक ले जायी गयी तब उन्होंने इसका […]

अकबर के काल में अनूदित रामायण – फारसी रामायण-चित्रित रामायण

 अकबर के काल में अनूदित रामायण भारत में मुसलमान शासकों का अंतिम वंश मुगल है जिसने शासन किया। मुगल शासनकाल में भारतीय चित्रकला के इतिहास में मुगल कला शैली, मुगल चित्रकला शैली का विकास हुआ। इसके पदचिह्न आज भी हम मुगलकालीन भवनों के ध्वंसावशेष में तथा मुगल कालीन रचनाओं एवं […]

भारोपीय भाषा परिवार : नामकरण एवं शाखाएं

भारोपीय भाषा परिवार विश्व का सबसे बड़ा भाषा परिवार है। अतिव्याप्ति एवं अव्यापप्ति दोष से बचने के लिये इस भाषा परिवार को भारोपीय भाषा परिवार नाम दिया गया। मैक्समूलर ने इस परिवार को ‘आर्य भाषा’ परिवार कहा था। लेकिन ‘आर्य’ में अव्याप्ति दोष था क्योंकि इससे मात्र भारत-ईरानी का ही […]