Category: साहित्य

हरिदास सिद्धान्तवागीश

हरिदास सिद्धान्तवागीश संस्कृत के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने घोर परतन्त्रताकाल में अपनी लेखनी द्वारा स्वातन्त्र्य की दुन्दुभि बजाये रखा। उनकी रचनाएं वीररस एवं ओजगुण से परिपूर्ण हैं। इसीलिये बीसवीं शती के संस्कृत रचनाकारों में उनका […]

शिलोञ्छवृत्ति

रश्मिरथी के दूसरे सर्ग में रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी ने ‘शिलोञ्छवृत्ति’ शब्द का प्रयोग किया है। “ब्राह्मण का है धर्म त्याग, पर, क्या, बालक भी त्यागी हों?जन्म साथ, शिलोञ्छवृत्ति के क्या वे अनुरागी हों?” प्रथम […]

पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

नहि तद्विद्यते किञ्चिद्यदर्थेन न सिद्धयति। यत्नेन मतिमांस्तस्मादर्थमेकं प्रसाधयेत्।। पञ्चतन्त्र, मित्रभेद, 2 इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक […]

शुकसप्तति । Shuksaptati katha

शुकसप्तति एक मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवं उपदेशात्मक कथासंग्रह है। इसकी भाषा संस्कृत है। प्राकृत में भी इसके श्लोक प्राप्त होते हैं । यह गद्य-पद्यात्मक रचना है। ऐसा माना जाता है कि परम्परा के प्रवाह में एक […]

रामायण काकावीन: इण्डोनेशिया की रामकथा

रामायण काकावीन: परिचय  इण्डोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित विशाल देश है। यह विश्व चौथी बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके साथ ही य यह सबसे बड़ा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश भी है। इस देश में […]

अकबर के काल में अनूदित महाभारत/रज़्मनामा

मुगल शासनकाल में अनेक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया। इसी क्रम में एक सहस्र श्लोकों वाले शतसाहस्री संहिता महाभारत का भी फारसी में ‘रज़्मनामा‘ नाम से अनुवाद हुआ। महाभारत के […]

अकबर के काल में अनूदित रामायण – फारसी रामायण-चित्रित रामायण

 अकबर के काल में अनूदित रामायण भारत में मुसलमान शासकों का अंतिम वंश मुगल है जिसने शासन किया। मुगल शासनकाल में भारतीय चित्रकला के इतिहास में मुगल कला शैली, मुगल चित्रकला शैली का विकास हुआ। […]

भारोपीय भाषा परिवार : नामकरण एवं शाखाएं

भारोपीय भाषा परिवार विश्व का सबसे बड़ा भाषा परिवार है। अतिव्याप्ति एवं अव्यापप्ति दोष से बचने के लिये इस भाषा परिवार को भारोपीय भाषा परिवार नाम दिया गया। मैक्समूलर ने इस परिवार को ‘आर्य भाषा’ […]