साहित्य

आदि शंकराचार्य विरचित “श्रीकृष्णाष्टकम्”

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनंस्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम्।सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकंअनङ्गरङ्गसागरं नमामि कृष्णनागरम्।। १।। मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनंविधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम्।करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरंमहेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम्।। २।। कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलंव्रजाङ्गनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्।यशोदया समोदया सगोपया सनन्दयायुतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्।। ३।। सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजंदधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम्।समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणंसमस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम्।। ४।। भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णदारकंयशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम्।दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनंदिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसम्भवम्।। ५।। […]

पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

नहि तद्विद्यते किञ्चिद्यदर्थेन न सिद्धयति। यत्नेन मतिमांस्तस्मादर्थमेकं प्रसाधयेत्।। पञ्चतन्त्र, मित्रभेद, 2 इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक धन का ही उपार्जन करना चाहिए । धन से ही समस्त वैभव और इच्छित वस्तुओं […]

शुकसप्तति । Shuksaptati katha

शुकसप्तति एक मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवं उपदेशात्मक कथासंग्रह है। इसकी भाषा संस्कृत है। प्राकृत में भी इसके श्लोक प्राप्त होते हैं । यह गद्य-पद्यात्मक रचना है। ऐसा माना जाता है कि परम्परा के प्रवाह में एक ग्रंथ के रूप में आने से पूर्व ही शुकसप्तति की कथायें लोक में प्रचलित थीं […]

अकबर के काल में अनूदित महाभारत/रज़्मनामा

मुगल शासनकाल में अनेक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया। इसी क्रम में एक सहस्र श्लोकों वाले शतसाहस्री संहिता महाभारत का भी फारसी में ‘रज़्मनामा‘ नाम से अनुवाद हुआ। महाभारत के अनुवाद के बाद जब अकबर के पास अनूदित पुस्तक ले जायी गयी तब उन्होंने इसका […]

अकबर के काल में अनूदित रामायण – फारसी रामायण-चित्रित रामायण

 अकबर के काल में अनूदित रामायण भारत में मुसलमान शासकों का अंतिम वंश मुगल है जिसने शासन किया। मुगल शासनकाल में भारतीय चित्रकला के इतिहास में मुगल कला शैली, मुगल चित्रकला शैली का विकास हुआ। इसके पदचिह्न आज भी हम मुगलकालीन भवनों के ध्वंसावशेष में तथा मुगल कालीन रचनाओं एवं […]

भारोपीय भाषा परिवार : नामकरण एवं शाखाएं

भारोपीय भाषा परिवार विश्व का सबसे बड़ा भाषा परिवार है। अतिव्याप्ति एवं अव्यापप्ति दोष से बचने के लिये इस भाषा परिवार को भारोपीय भाषा परिवार नाम दिया गया। मैक्समूलर ने इस परिवार को ‘आर्य भाषा’ परिवार कहा था। लेकिन ‘आर्य’ में अव्याप्ति दोष था क्योंकि इससे मात्र भारत-ईरानी का ही […]