कोविड-19: डिप्रेशन से कैसे बचें-दूसरों को भी बचाएँ

अवसाद (dipression) किसी को भी हो सकता है।

आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में कुछ बुरा ही हो तभी उसे तनाव और अवसाद हो। सबकुछ अच्छा चल रहा हो तब भी डिप्रेशन हो सकता है।

हमारे देश में अभी भी अवसाद को बीमारी नहीं समझा जाता। मानसिक बीमारियों को नजरअंदाज किया जाता है। इसीलिए अनेक बार हम यह जान ही नहीं पाते कि हमारे आस-पास किसी को या स्वयं मुझे अवसाद घेर रहा है।

समय रहते यथा अवसाद के समस्या से निपटा न जाये तो बाद में चलकर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

आजकल कोविड-19 के संक्रमण से आवागमन एवं परस्पर मेलजोल बन्द होने से एक नये तरह का अवसाद समाज में फैल रहा है। लोग भयभीत हो रहे हैं। कई लोग गलत कदम भी उठा रहे हैं। ऐसे में आज अवसाद के विषय में जागरूकता जरूरी है

अवसाद से निकलने और फिर ऊर्जावान जीवन जीने के लिए आवश्यक है कि हम सबसे पहले अवसाद के लक्षणों को जाने। यद्यपि हर व्यक्ति में मे लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं परन्तु कुछ ऐसे लक्षण हैं जो अधिकांश लोगों में समान होते हैं। तो आईये जानते हैं।

अवसाद/डिप्रेशन के लक्षण:-

1. हमेश दुःखी रहना।

2. झूठी मुस्कान बनाये रहना। दिल खोलकर न हँसना।

3. किसी भी काम में लम्बे समय तक चाहकर भी मन न लगना।

4. किसी से बात करने की इच्छा न होना।

5. भोजन में रुचि समाप्त हो जाना, या बिना स्वाद लिये बहुत भोजन करना।

6. बिना बीमार हुये बिस्तर पर पड़े रहना। दैनिक क्रिया के लिए भी इच्छा का न होना।

7. नकारात्मक बात सोचना और नकारात्मक बात करना।

8.अच्छी-बुरी हर प्रकार की बात में मीन-मेख निकालना और चिड़चिड़ाना।

9. किसी की अच्छी बात का भी बुरा मान जाना।

10. जीवन का कुछ अर्थ नहीं है ऐसी सोच होना।

11. आत्महत्या के बारे में सोचना।

12. लोगों से मिलने-जुलने की इच्छा न होना।

13.अपने को असहाय महसूस करना।

14.नींद न आना। विशेषकर कुछ घंटे सोकर नींद टूट जाने पर फिर न सो पाना।

15. जिजीविषा, जीने की इच्छा समाप्त हो जाना।

16.अचानक से वैराग्य और संन्यास जैसी बातें करना।

चाल-ढाल-व्यवहार-बोली आदि में ऊर्जा, उत्साह के स्थान पर थकावट एवं आलस्य दिखना।

अवसाद डिप्रेशन के कारण :-

अवसाद के हर व्यक्ति की परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग कारण होते हैं। परन्तु कुछ कारण हैं जो सबमें समान होते हैं :-

1. जीवन में और काम में एकरसता। अर्थात् एक ही काम करते रहने से व्यक्ति का उत्साह समाप्त हो जाता है। और वो धीरे-धीरे अवसादग्रस्त होता जाता है।

2. समाज में अपनी है से बड़े लोगों से तुलना करके चिंताग्रस्त रहना।

3.परिवार और माता-पिता द्वारा बहुत अधिक अपेक्षा करना और यह चाहना कि व्यक्ति उनके अनुसार ही चले।

4.बहुत दिन तक सूर्य के प्रकाश में न निकलना। छाया में ही रहना। जिससे हार्मोन का विपरीत स्राव होता है।

5. दिनचर्या का अस्त-व्यस्त होना।

6.कार्यस्थल पर आवश्यकता से अधिक कार्य का भार।

7.परिवार एवं रिश्तेदारों द्वारा विभिन्न कामों के लिए दबाव

8.कोई बड़ा दुःख जिससे उबर प2ना, निकल पाना मुश्किल हो।

9. व्यक्ति के द्वारा किया गया ऐसा अपराध जिसके विषय में वही जानता हो। ऐसा अपराध उसके मन में सालता रहता है और उसे अपराधबोध होता रहता है। चूंकि किसी से वह कह नहीं पाता इसलिए अवसादग्रस्त हो जाता है।

10. प्रज्ञापराध-मन और वचन से किसी के लिये गलत सोच। यह भी अवसाद का कारण है।

11. समाज की अपेक्षा सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से।

12. किसी खतरे के बारे में सोचकर भयभीत और चिंतित होने से। जैसे आजकल कोविड-19 के खतरे के बारे में।

अवसाद/डिप्रेशन का उपचार:-

1. सामाजिक मेल-जोल बढ़ायें। आजकल फोन से अपनों से बात करें।

2.सूर्य के प्रकाश का सुबह सेवन करें।

3. खुली ताज़ी हवा में 15-20 बार पूरा फेफड़ा भरकर साँस भरें। फिर थोड़ा रोककर निकालें।

4.योग एवं प्राणायाम करें।

5.मीठे फल एवं गुड़ आदि खायें।

6.कोई आध्यात्मिक अथवा रुचि की पुस्तक पढ़ने का प्रयास करें।

7.धीमी ओर मधुर संगीत सुनें। यदि आपके आसपास कोई गा पाता हो तो उससे गाकर सुनाने के लिए कहें।

8.अपनी रुचि का काम सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग या और कुछ जो भी करना चाहते हों करने का प्रयास करें
यदि आसपास नदी है तो उसकी धारा के प्रवाह की आवाज सुनें।

9.चिड़ियों की चँहचहाहट ध्यान देकर सुनें। आँख बंदकर।


10. प्राकृतिक सुगंध इत्र आदि का सोने के समय प्रयोग करें।


11. हो सके तो सुगंधित फूलों के पौधे घर पर लगायें – मोगरा, बेला, रातरानी अदि।


12. अन्य लोगों के कष्ट और दुःखों को भी देखने का प्रयास करें।


13. यदि आपके मन को कोई बात बार-बार
पीड़ा पहुँचा रही है और आप कासी से कह नहीं पाते। तो आप अपने पूजास्थल जायें और वहाँ मन में जिस भी इष्टदेव को मानते हो उनसे वह उद्गार व्यक्त करें। यदि सूनसान स्थान हो तो बोल भी सकते हैं।


14. कोई भी दुःख जो आपके मन को दुःखी कर रहा हो उसे कागज पर लिख डालें और फिर उस कागज को जला दें।

अवसाद/डिप्रेशन से बचाव:-

1. सबसे पहले यह मानें कि कोई भी व्यक्ति सब कुछ नहीं कर सकता। सबकी आशाओं – अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सकता।


2.कोई बात यदि आपको न पसंद आये और आप कुछ कहना चाहते हों तो उसे मन में न रखें अपितु बोल दें।


3. आपको न कहना आना चाहिये। सभी को खुश करने के चक्कर में न पड़ें। आप कुछ भी कर लेंगे पर कोई न कैसी ऐसा होगा जो खुश नहीं होगा। इसलिए अपनी खुशी और संतुष्टि के बारे में भी सोचें।


4.कोई भी बात मन में न रखें। किसी से कह नहीं सकते तो लिखकर जला दें। बातें जब निकल जाती हैं दिल का बोझ हल्का हो जाता है।


5. प्रतिदिन कुछ मिनट धूप में अवश्य रहें।


6. अकेले न रहें। अकेले रहने से तनाव और अवसाद बढ़ता है।


7. खाने में मीठे फल खायें।


8. जो आपको पसंद न आये उसे बोलना सीखें। मन के अंदर बात न रखें।


9. रिश्तेदारों – नातेदारों-मित्रों और परिवार से संबंध रखें।


10. अपने से ऊपर वाले को ही न देखें। उनको भी देखें जिनके जीवन में आपसे अधिक संघर्ष है।


11. गाय-भैस-कुत्ता आदि कोई पालतू पशु अवश्य रखें।
वह काम सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर करें जिसमें आपकी रुचि है तथा जिससे आपको प्रसन्नता मिलती है।


12. योग और प्राणायाम करें।


13. सुगंधित फूलों के पौधे लगायें।


14. कृत्रिम सुगंध के स्थान पर प्राकृतिक सुगंध इत्र आदि का प्रयोग करें।


15. खेल खेलें।


16. दान देने की प्रवृत्ति भी जीवन में ऊर्जा और उत्साह बनाये रखने के लिए आवश्यक है।


17. शंखपुष्पी. का सेवन भी लाभप्रद है।

18. प्राकृतिक स्थानों का भ्रमण करें।

19. सकारात्मक साहित्य पढ़ें और फिल्म आदि देखें।

कोविड-19 के दौरान अवसाद से कैसे बचें?

1. कोरोना के संक्रमण काल में अवसाद से बचने और उबरने के लिए आवश्यक है कि आप अपने अपनों के निरन्तर संपर्क में रहें। अपनी रुचि का काम जो घर पर कर सकते हैं करें।

2. प्रतिदिन कुछ समय धूप में अवश्य रहें।

3.कोरोना का दिनभर अपडेट देखना कम करें।

4.रुचि का सकारात्मक सीरियल देखें, पढ़ें, संगीत सुनें।

5. यह मानकर चले कि समय एक पड़ाव है हमेशा के लिए ठहराव नहीं। बीत जायेगा।

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