हरी मिर्च के विषय में रोचक तथ्य एवं भारत की प्रसिद्ध हरी मिर्च (Interesting Facts about Green Chilli and famous chillies of India)

भोजन को स्वादिष्ट व चटपटा बनाने के लिये  हरी मिर्च का पूरे विश्व में प्रयोग होता है। हरी मिर्च पककर लाल रंग की हो जाती है और सूखने पर भी यह लाल होती है । इसी से लाल मिर्च बनती है और लाल मिर्च पावडर बनाया जाता है । भोजन व खाद्य-पदार्थों का स्वाद बढ़ाने के लिये हरी मिर्च, लाल मिर्च व लाल मिर्च पावडर तीनों का उपयोग होता है।

हरी मिर्च का इतिहास एवं विकास(History and Development of Green Chilli)

हरी मिर्च का मूलस्थान दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित देश ‘मैक्सिको‘ है। मैक्सिको से ही पूरे विश्व में इसकी खेती तथा इसके उपयोग का प्रसार हुआ है।
मैक्सिको से हरी मिर्च के विषय में ज्ञान प्राप्त करने वाला पर्थम देश कोलम्बिया है। यूरोपीय लोगों को हरी मिर्च/लाल मिर्च का ज्ञान क्रिस्टोफर कोलम्बस द्वारा प्राप्त हुआ । कोलम्बस ने दक्षिण अमेरिका की यात्रा में हरी मिर्च से परिचय प्राप्त किया। चूंकि यूरोपीय पहले से ही भारतीय उपमहाद्वीप में उगायी जाने वाली काली मिर्च से परिचित थे अतः वैसे ही तीक्ष्ण स्वाद के कारण इसको भी उन्होंने ‘पेपर’ कहा और तब से हरी मीर्च ‘ग्रीन पेपर’ लाल मिर्च ‘रेड पेपर‘ कहलाने लगी।

हरी मिर्च का भारत से परिचय

हरी मिर्च का भारत आगमन 15वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के साथ हुआ। पुर्तगाली लोग भारत के काली मिर्च को जानते थे और इसके व्यापार से भी परिचित थे। वे स्वाद में समानता के आधार हरी मिर्च/लाल मिर्च को भारत लाये और उसका प्रचार-प्रसार किया।

हरी मिर्च का परिचय

हरी मिर्च हरे रंग की होती है। पकने पर लाल हो जाती है । पौधे की पत्तियाँ गहरे हरे रंग की होती हैं। फूल श्वेत होते हैं। पौधा कुछ सेंटीमीटर से लेकर दो-ढाई फुट तक हो सकता है ।
हरी मिर्च आकार में लम्बी तथा गोल होती है। मोटाई में यह कुछ मिलीमुटर से लगभग दो सेंटीमीटर तक मोटी हो सकती है। गोल मिर्च लम्बी मिर्च की अपेक्षा अधिक तीखी होती है।

नागालैंड की राजा मिर्च/ राजा मिर्चा/जोलोकिया/Ghost pepper/ नागा मिर्चा

भारत के नागालैंड राज्य में उत्पन्न होने वाली मिर्च ‘जोलोकिया’ जिसकी प्रसिद्धि ‘राजामिर्चा’ के नाम से है। विश्व की सबसे तीखी मिर्च है। तीखेपन के कारण इसका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रेकार्ड में सम्मिलित किया गया है ।

मणिपुर की सिराराखोंग मिर्च/हाथेई चिली/हाथी मिर्च/उमोरुक

मणिपुर में उत्पन्न होने वाली सिराराखोंग मिर्च, जिसे हाथेई मिर्च या हाथी मिर्च के नाम से जानते हैं, को भौगोलिक सूचकांक (GI) टैग प्राप्त हुआ है। इका उत्पादन मणिपुर के उकरुल/उखरूल जिले कै सिराराखोंग गाँव में होता है। यह मिर्च महादेव पहाड़ी में ही उगती और फलती है। अन्यत्र उत्पादन नहीं होता।
इको भगवान् द्वारा दिया गया उपहार और उकरुल का गौरव माना जाता है।
यह मिर्च तीखी होने के साथ-साथ थोड़ी मिठास और थोड़ा खट्टापन लिये होती है ।यही इकी विशेषता है।

कश्मीरी मिर्च

कश्मीरी मिर्च भारत के जम्मे-कश्मीर और इमाचल राज्य में उत्पन्न होती है। पकने और सूखने पर इसका रंग चटख लाल होता है। खाद्य-पदार्थों में इसके प्रयोग से चटख लाल रंग अच्छा निखरता है। यह मिर्च कम तीखी होती है । अतः कश्मीरी लाल मिर्च और कश्मीरी लाल मिर्च के चूर्ण /पावडर का प्रयोग भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ भोजन का रंग निखारने और उसे आकर्षण बनाने के लिये भी किया जाता है ।

ज्वाला मिर्च

ज्वाला मिर्च भारत के गुजरात राज्य में उत्पन्न होती है। मुख्यतः यह गुजरात के मेहसाणा और खेड़ा जनपदों में उगायी जाती है । जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ‘ज्वाला’ अर्थात् यह भयंकर तीखी होती है। चटनी-अचार आदि में इसका उपयोग होता है। अपने तीखेपन के कारण यह मिर्च बहुत पसंद की जाती है ।

गुंटूर मिर्च

गुंटूर मिर्च का उत्पादन भारत के आन्ध्रप्रदेश के गुन्टूर जनपद में होता है। वर्तमान में यह आसपास के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी उगायी जाने लगी है। आन्ध्रप्रदेश के व्यंजन में गुंटूर मिर्च की ही प्रधानता होती है। यह बहुत लोकप्रिय है तथा इसका भारतूसे बाहर निर्यात भी किया जाता है।

मुंडू मिर्च

मुंडू मिर्च आकार में गोल और छोटी होती है । यह तमिलनाडु और आन्ध्रप्रदेश में उगायी जाती है। इका स्वाद विशिष्ट होता है।

ब्यादगी मिर्च/देगी मिर्च

ब्यादगी मिर्च कर्नाटक में उगायी जाती है । इसका नामकरण ब्यादगी नामक स्थान के नाम पर हुआ है । ब्यादगी नगर कर्नाटक के हावेरी जनपद में स्थित है। यह मिर्च अधिक तीखी नहीं होती परन्तु कश्मीरी मिर्च की अपेक्षा अधिक तीखी होती है। यह बहुत प्रसिद्ध मिर्च है।इसे ‘देगी मिल्च’ के नाम से जाना जाता है। ‘देगी’ शब्द ‘ब्यादगी’ का ही अपभ्रंश है। यह मिर्च लम्बी होती है तथा त्वचा पर सिकुड़न होती है। रंग गहरा लाल होता है।