मशीनी अनुवाद के सैद्धान्तिक आधार (Theoretical Concepts of Machine Translation)

मशीनी अनुवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

किसी एक भाषा में लिखित सामग्री अथवा कही गयी बात का किसी दूसरी भाषा में प्रस्तुति अनुवाद है। विश्व में अनेक भाषायें बोली जाती हैं और अनेक भाषाओं का समृद्ध साहित्य भी है। वैश्विक स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान में परस्पर भाषा का ज्ञान न होना एक बड़ा अवरोध है। ज्ञान एवं सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान होता रहे इसलिए अनुवाद की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। एक भाषाभाषी दूसरी भाषा में कही गयी बात अथवा लिखित सामग्री का ज्ञान तभी प्राप्त कर सकता है जब वह दूसरी भाषा से भलीभाँति परिचित हो। उस भाषा का ज्ञाता हो। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति के लिये प्रत्येक भाषा का ज्ञान प्राप्त करना असम्भव है।

भारत में एक व्यक्ति न्यूनतम तीन भाषा और अधिकतम दस-पन्द्रह भाषायें पढ़-बोल-समझ सकता है। परन्तु समग्र विश्व में ऐसा नहीं है। जो लोग दूसरी भाषा का ज्ञान नहीं रखते उनतक उस भाषा में निहित ज्ञान पहुँचाने का माध्यम बनता है अनुवाद। अनुवाद ने ज्ञान को सुलभ बनाया है तथा विभिन्न व्यक्तियों, समूहों, प्रान्तों एवं देशों के मध्य पारस्परिक व्यवहार को सरल बनाया है तथा ज्ञान को सब तक पहुँचाया है।

विश्व के विभिन्न देशों में जैसे-जैसे पारस्परिक संबंध बढ़ा है वैसे-वैसे अनुवाद का महत्त्व भी बढ़ा है। इतनी अधिक भाषाएँ और सबमें परस्पर अनुवाद की अपेक्षा ने अनुवादकों की माँग बढ़ा दी है। सूचना की क्रान्ति के साथ अनुवाद और अनुवादकों की आवश्यकता निरन्तर बढ़ती चली गयी। मनुष्य द्वारा किये जाने वाला अनुवाद श्रमसाध्य एवं समयसाध्य होने के साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी आर्थिक दबाव डालने वाला होता है।

एक व्यक्ति यदि अनुवाद करेगा तो अनुवाद में न्यूनतम कुछ घंटे, दिन, माह, वर्ष तो लगेंगे ही। इसके साथ ही अनुवाद को मानव अनुवादक की भावनाएं भी प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के लिये मनुष्य अपने राष्ट्र, राष्ट्रीयता, पन्थ और मान्यता से बँधा होता है। अतः संभव है कि वह अनुवाद करते समय यदि कोई सूचना उसके हितों के विपरीत हो तो उसे छुपा ले और उद्घाटित न करे।

अनुवाद में मानव अनुवादकों की भावनाओं के समावेश की आशंका की पृष्ठभूमि में ही मशीनी अनुवाद का विचार प्रकट हुआ । मशीन के मानव जैसा हृदय और मस्तिष्क नहीं होता अतः वह भावनाओं के प्रवाह में सूचनाओं से छेड़छाड़ नहीं करेगी। विचारकों एवं विद्वानों की ऐसी धारणा है। इसी धारणा के आलोक में यान्त्रिक अनुवाद (Machine Translation) के क्षेत्र में प्रयास होने प्रारम्भ हुये।

प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के मध्य के कालखंड में विचारवपन हुआ तथा द्वितीय विश्वयुद्ध की अवधि में यान्त्रिक अनुवाद पर कार्य प्रारम्भ हुआ। तत्कालीन विश्व की दो शक्तियाँ मित्रराष्ट्र और धुरीराष्ट्र आमने-सामने थीं। गुप्तचर विभाग को निर्दुष्ट सूचना प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास करना पड़ता था। ऐसे में यह विचार आया कि मशीन यदि अनुवाद में सक्षम हो जाये तो सूचना को लेकर संतुष्टि तो मिलेगी ही उसके साथ ही साथ मानव-जीवन में सहजता भी आयेगी । अनुवाद में लगने वाले समय की बचत होगी तथा व्यापक रूप से अनुवाद सम्भव होगा।

इसी विचार के आलोक में यान्त्रिक अनुवाद पर शोध परियोजनायें प्रारम्भ की गयीं। यह आरम्भ वास्तव में तकनीकि के क्षेत्र में एक क्रांति का सूत्रपात था । एक आमूलचूल परिवर्तन की आधार शिला।

अपने आरम्भिक काल से आजतक मशीनी अनुवाद के क्षेत्र में निरन्तर शोध हो रहा है और प्रत्येक नवीन शोध एवं परियोजना के साथ लक्ष्य समीप आता जा रहा है और सफलता की संभावना बढ़ रही है। वर्तमान में विश्व की लगभग समस्त प्रधान एवं महत्वपूर्ण भाषाओं में यान्त्रिक अनुवाद पर कार्य हो रहा है । जिसके लिये कुछ भाषाओं ने स्वयं को सायास मशीन के अनुरूप भी बनाया है।

मशीनी अनुवाद के क्षेत्र में प्रगति के साथ सूचनाओं के पारस्परिक आदान-प्रदान में क्षेत्रफल की दृष्टि से विस्तार हुआ है तथा मानव अनुवादकों के लिये भी सरलता हुयी है। अब मानव अनुवादक मशीन की सहायता से अनुवाद कर उसमें संशोधन करके अपेक्षाकृत कम समय में अनुवाद उपलब्ध करवा देते हैं ।
यही नहीं सामान्य जनता भी यान्त्रिक अनुवाद के क्षेत्र में होले वाली प्रगति से लाभान्वित हो रही है । आज अनेक भाषाओं में लिखित सामग्री को अपनी भाषा में पढ़ पाना सरल हो गया है। सोशल मीडिया की कई वेबसाइट पर स्वतः अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है। जो दूसरी भाषा में दिये गये पाठ को आपके समक्ष आपकी भाषा में अनूदित करके प्रस्तुत करते हैं, उदाहरण के लिये फेसबुक। फेसबुक पर यदि आप हिंदी का अधिक प्रयोग करते हैं तो फेसबुक आपकी सूचना के आधार पर अंग्रेजी, इटैलियन, फ्रेंच आदि में पोस्ट की गयी सामग्री को आपके समक्ष हिन्दी में स्वतः अनुवाद करके प्रस्तुत करता है।

इस प्रकार यान्त्रिक अनुवाद ने जनसामान्य के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। आज व्यक्ति यदि कोई भाषा नहीं जानता तो उसे उस भाषा में कही गयी अथवा लिखी गयी बात के लिये दोनों भाषाओं का ज्ञान रखने वाले और अनुवाद कर सकने वाले व्यक्ति को नहीं खोजना पड़ेगा अपितु वह  व्यक्ति मशीन की सहायता से अनुवाद करके स्वयं एक स्तर तक अर्थ समझ जायेगा। भाषाविशेषज्ञ की आवश्यकता उसे विशेष अर्थावबोध के लिये होगी अन्यथा सामान्य अर्थ तो वह स्वयं समझ जायेगा।

मशीनी अनुवाद की यह बड़ी उपलब्धि है इस विचार ने सूचना की क्रांति को अभूतपूर्व गति दी है और आज अनेक अर्थों में ‘विश्वमिदं एकनीडम्’ व ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ भावना पुष्ट हो रही है ।