भाषाओं का मानवकृत अनुवाद बनाम मशीनी अनुवाद
(Human vs Computer Translation of Languages)

अनुवाद

अनुवाद एक भाषा में लिखित अथवा कही गयी सामग्री का दूसरी भाषा में प्रस्तुति है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति जिस भाषा को नहीं जानता है उसमें कही अथवा लिखी गयी बातों को जान सकता है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है उसे स्रोत भाषा (Source language) कहते हैं और जिस भाषा में अनुवाद किया जाता है उसे लक्ष्यभाषा (Target Language) कहते हैं।
अनुवाद के माध्यम से स्रोतभाषा की सामग्री लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत की जाती है। इस प्रकार स्रोत भाषा को न जानने वाले लोगों तक लक्ष्य भाषा की बातें अनुवाद के माध्यम से पहुँच जाती हैं। उदाहरण के लिये कोई हिन्दीभाषी है। उसे मलयालम नहीं आती और उसे मलयालम के प्रसिद्ध लेखक तकषी शिवशंकर पिल्लै का उपन्यास ’चेम्मिनि’ पढ़ना है। इसके विषय में उसने सुन रखा है। ऐसे में वह उस उपन्यास को कैसे पढ़ आयेगा? उस उपन्यास को पढ़ने के लिये उसे अनुवाद और अनुवादक की आवश्यकता पड़ेगी। उपन्यास का अनुवाद वही कर पायेगा जिसे स्रोत भाषा-मलयालम और लक्ष्यभाषा-हिन्दी का सम्यक् ज्ञान हो। ऐसा अनुवादक उपन्यास का हिन्दी में अनुवाद कर हिन्दी के पाठक को उपलब्ध करवायेगा। जिसे हिन्दी का पाठक पढ़ सकेगा। हिन्दी में इस उपन्यास का अनुवाद साहित्य अकादमी द्वारा करवाया ’मछुआरा’ शीर्षक से करवाया गया है।

मानव-अनुवाद (Human Translation)

साहित्य अकादमी द्वारा विभिन्न भाषाओं के साहित्य का अनुवाद करवाया जाता है। यह अनुवाद मानव द्वारा लिया जाता है। स्रोतभाषा एवं लक्ष्यभाषा को जानने वाले भाषाविद् (Linguist) अनुवादकार्य सम्पन्न करते हैं। इसप्रकार परस्पर भाषा न जानने पर भी साहित्यप्रेमी व्यक्ति दूसरी भाषाओं के साहित्याध्ययन का आनन्द उठा सकते हैं।
मानव द्वारा किया जाने वाला अनुवाद मशीन द्वारा किये जाने वाले अनुवाद की अपेक्षा बहुत शुद्ध होता है। उसमें त्रुटि होने की सम्भावना नहीं रहती। मानव द्वारा किया जाने वाला अनुवाद निर्दुष्ट होता है और अनुवादक अनुवाद करते समय इस बात का ध्यान रखता है कि स्रोतभाषा में कही गयी बात का भाव लक्ष्यभाषा में ठीक-ठीक उतर सके। अतः भावप्रधान वाक्यों का अनुवाद करते समय वह विशेष सजग रहता है। अनुवाद केवल शब्दों का अर्थ इधर से उधर रख देना नहीं है। अपितु अनुवाद में इस बात का ध्यान रखा जाना बहुत अपरिहार्य है कि स्रोतभाषा की बात उतनी ही गहराई और प्रभाव के साथ लक्ष्यभाषा तक पहुँच सके।
भाषा प्रवाहमयी होती है। उसमें नित परिवर्तन होते रहते हैं। प्रत्येक भाषा अपने प्रयोगक्षेत्र के भूगोल, इतिहास, संस्कृति आदि से प्रभावित होती है। यह प्रभाव उसकी शब्दावलियों में और उसके भाषिक प्रयोगों में दिखायी पड़ता है। ऐसे में जब किसी भाषा की सामग्री का किसी दूसरी भाषा में अनुवाद करना होता है तब एक मानव अनुइवादक सांस्कृतिक-भौगोलिक पक्षों का भी ध्यान रखता है। मानव अनुवादक भाषा में प्रयुक्त लोकोक्तियों एवं मुहावरों का भी ध्यान रखते हुये यह प्रयास करता है कि लक्ष्यभाषा में उसके द्वारा किये गये अनुवाद का वैसा ही अर्थ और प्रभाव हो जैसी स्रोतभाषा की सामग्री का स्रोतभाषा में होता है। इसके लिये अनेक बार अनुवादक को अनुवाद करते समय शोध तथा चर्चा-परिचर्चा भी करना पड़ता है। क्योंकि वह चाहता है कि उसके द्वारा किया गया अनुवाद उतना ही प्रभावी हो जितना मूल में है। इस प्रकार एक मानव अनुवादक प्रत्येक पंक्ति का अनुवाद बहुत सावधानीपूर्वक और सोच-समझकर करता है। अनुवाद करने के बाद उसे पुनः पढ़कर भाषिक प्रवाह और अर्थ की निर्बाधता आदि का अवलोकन किया जाता है। यदि कहीं भाषा के प्रवाह में अवरोध हो रहा है अथवा सटीक अर्थबोध नहीं हो रहा तो अनुवादक अनुवाद किये गये वाक्य और सन्दर्भ पर पुनर्विचार करता है और यह सोचता है कि स्रोतभाषा के अमुक शब्द के लिये लक्ष्यभाषा का कौन सा शब्द अधिक उपयुक्त होगा? इस प्रकार कई चरणों में परीक्षण के बाद मानव अनुवादक अनुवाद का कार्य सम्पन्न करता है।

मशीनी अनुवाद (Machine Translation)

यन्त्र ने मनुष्य के जीवन को सरल बनाया है तथा अत्यन्त श्रमसाध्य कार्यों को साधा है। मशीनी अनुवाद ने भी मानव जीवन को सरल बनाते हुये उसे बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ और शारीरिक श्रम के दूसरी भाषा की सामग्री का ज्ञान करवाया है। मशीनी अनुवाद में प्रारम्भिक समय से अजतक निरन्तर विकास हो रहा है। इस विकास के साथ मशीन द्वारा किये जाने वाले अनुवाद में शुद्धता का स्तर भी सुधर रहा है। आज के दस वर्ष पहले मशीन जिसप्रकार अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद करती थी और उस अनुवाद में जो त्रुटियाँ होती थीं। वो आज नहीं होतीं। उनमें आज बहुत सुधार है। मशीन अब साधारण वाक्यों का शुद्धरूप से अनुवाद करने में सक्षम है। मशीन द्वारा अनुवाद की क्षमता विकसित करने तथा उसे प्रत्येक व्यक्ति को इंटरनेट और विभिन्न सोशल साइट्स पर निःशुल्क उपभोग हेतु प्रस्तुत करने से सामान्य व्यक्ति के जीवन में सुधार आया है। आज किसी अन्य भाषा की छोटी-छोटी बातों को समझने के लिये किसी को किसी अनुवादक और उस भाषा के जानकार के पास नहीं भागना पड़ता अपितु वह स्वयं इंटरनेट पर उपलब्ध अनुवादकों के माध्यम से कही गयी बात का साधारण अर्थ अपनी भाषा में जान सकता है। यद्यपि आज भी किसी बात का मर्म जानने और बात में निहित लक्षणा-व्यंजना आदि के ज्ञान के लिये मानव अनुवादकों की अपेक्षा रहती है।

मानवकृत अनुवाद का सकारात्मक पक्ष/ लाभ ( Benifits of Human Translation)

  • मानव द्वारा किया गये अनुवाद में त्रुटि का सम्भावना बहुत कम रहती है।मानव अनुवाद करते समय भाव एवं भावनाओं का ध्यान रखता है ऐसे में किसी की भावना को ठेस पहुँचने की संभावना कम रहती है। तथा स्रोतभाषा की सामग्री को लक्ष्यभाषा में ठीक से समझ पाने मे सहायता मिलती है।
  • पद्य, काव्य आदि का अनुवाद मानव अनुवादक ठीक से कर पाता है। पद्य में रस, छन्द, अलंकार आदि की समझ मानव अनुवादक को होती है। मशीन में अभी यह समझ नहीं विकसित हुयी है।
    मानव अनुवादक अनुवाद करते समय संदर्भ व देश-काल-परिस्थिति का ध्यान रखता है। मशीन अभी सन्दर्भ का ध्यान नहीं रख पाती।
  • मानव अनुवादक भाव, भाषा, कथ्य, लोकोक्ति एवं मुहावरों का ध्यान रखते हुये तदनुरूप अनुवाद करता है अतः स्रोतभाषा में कही गयी बात अधिक स्पष्टता से लक्ष्याभाषा में अनूदित हो पाती है।

मानवकृत अनुवाद का नकारात्मक पक्ष (Challanges of Human Translation)

  • मानवकृत अनुवाद में समय, श्रम और धन अधिक लगता है। मानव अनुवादक अनुवाद करने में कुछ घण्टों से लेकर दिन और महीने तक लगा सकता है।मानव द्वारा अनुवाद करवाने में अनुवादकों की नियुक्ति में धन का व्यव भी अधिक है। अधिक कार्य होंने पर अधिक संख्या में अनुवादक अपेक्षित होते हैं।
  • मानव अनुवाद में परिश्रम अधिक लगता है तथा प्रत्येक अनुवादक द्वारा अधिकतम अनुवाद कर सकते की सीमा है।
  • सबसे बड़ी बात मानव अनुवादक होता तो मनुष्य ही है अतः अनुवाद करते समय उसकी भावनायें भी अनुवाद से जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि स्रोतभाषा में कुछ ऐसी बात कही गयी है जो उसके विचार, देश, संस्कृति अथवा मान्यता से मेल नहीं खाती या उसके विरुद्ध है तो ऐसा सम्भव है कि उस बात को वह छुपा ले जाये अथवा उस कथन आदि को उतनी गम्भीरता से न प्रस्तुत करे। ऐसे में अनुवाद के माध्यम से बड़ी भूल हो सकती है। ऐसी भूलें और विसंगतियाँ उस समय अधिक होंने की सम्भावना हैं जब दो देश आपस में व्यवहार कर रहे हों और अनुवादक उस देश का वासी हो जिस देश की भाषा का अनुवाद दूसरी भाषा में होना है। उदाहरण के लिये यदि भारत के किसी शत्रु देश की भाषा में कही गयी सामग्री का अनुवाद करन हो और अनुवादक उसी शत्रुदेश का हो अथवा किसी कारणवश उसकी उस देश के प्रति भक्ति हो। वह लक्ष्यभाषा और स्रोतभाषा दोनों का ज्ञाता हो। ऐसे में बहुत सम्भव है कि वह अनुवाद करते समय उन बातों को छुपा ले जाये जिनका उसके देश पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ऐसा होने पर किसी देश की राष्ट्रनीति और विदेशनीति प्रभावित हो सकती है।

मशीनी अनुवाद के लाभ ( Advantage of Machine Translation)

  • मशीनी अनुवाद में समय कम लगता है। कम्प्यूटर में स्रोतभाषा की सामग्री प्रदान (इनपुट) करते ही निमिषमात्र में लक्ष्यभाषा में अनुवाद सम्पन्न हो जाता है। इस प्रकार मशीन द्वारा अनुवाद से समय की बचत होती है।छोटे-छोटे और साधारण वाक्यों का अनुवाद मशीन द्वारा शुद्धरूप से हो जाता है ऐसे में किसी व्यक्ति या संस्था को किसी छोटी सी बात को जानने के लिये मानव-अनुवादक की खोज में भटकना नहीं पड़ता अपितु मशीनी अनुवादक सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके वह स्वयं अर्थ जान सकता है।
  • उन क्षेत्रों में जहाँ नियत और निश्चित पारिभाषिक शब्दावलियों का प्रयोग होता है मशीनी अनुवाद से अच्छी परिणाम आते हैं अतः ऐसी सामग्री के अनुवाद के लिये लगने समय और श्रम में बचत होती है।
  • मशीनी अनुवाद में श्रम भी नहीं लगता। सरलता से एक क्लिक पर अनुवाद सम्पन्न हो जाता है।
  • मशीन द्वारा अनुवाद किये जाने से धन की भी बचत होती है। जो कार्य अनेक अनुवादक लाखों रुपया खर्च करके बहुत परिश्रमपूर्वक महीनों में सम्पन्न करते वह कार्य को मशीन द्वारा पलक झपकते ही हो जाता है।

मशीनी अनुवाद का नकारात्मक पक्ष/ मशीनी अनुवाद की चुनौतियाँ(Challenges in Machine Translation)

  • मशीन द्वारा पूर्णतः शुद्ध अनुवाद करना अभी सम्भव नहीं है अतः मशीन द्वारा किये गये अनुवाद को जाँचने तथा शुद्ध करने के लिये मानव अनुवादकों की आवश्यकता होती है।मशीन भाव, भावनाओं, भूगोल, संस्कृति का आदि से अपरिचित होने के कारण अनुवाद के इस पक्ष की अनदेखी करती है। इसीलिये मशीन द्वारा किये गये अनुवाद में अनेक बार भयंकर भूलें दिखायी पड़ती हैं।
  • मशीन किसी भी भाषा की लोकोक्तियों और मुहावरों का शुद्ध अनुवाद करने में अभी सक्षम नहीं है।
  • मानव अनुवादक अनुआद करते समय सदैव सन्दर्भ (Context) का ध्यान रख्ता है जबकि मशीन को अभी सन्दर्भों का ज्ञान नहीं है इसीलिये मशीन द्वारा किये गये अनुवाद में असम्बद्धता बहुत होती है।
    मशीनी अनुवाद अभी इतना विकसित नहीं है कि वह किसी भाषा के साहित्य का स्वतः अनुवाद कर दे। साहित्यिक प्रवृत्तियों रस, छन्द और अलंकार का अनुवाद अभी मशीन द्वारा सम्भव नहीं है।
  • इस प्रकार मानवकृत अनुवाद एवं मशीनी अनुवाद दोनों ही स्रोतभाषा की सामग्री को लक्ष्यभाषा के पाठकवर्ग तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

मशीनी अनुवाद: भविष्य में संभावनाएं

मशीनी अनुवाद का तेजी से विकास हो रहा है और इस विकासकार्य को मानव अनुवादकों, भाषाविदों के माध्यम से सम्पन्न किया जा रहा है। प्रयास यह है कि मशीन मानव की तरह अनुवाद करने में सक्षम हो सके । उसके लिये मानव के भाषा और भाषा सीखने, समझने, बोलने और प्रयोग करने संबन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन कर मानव-मस्तिष्क में घटित होने वाली गणनाओं आदि को मनोवैज्ञानिक आधार पर समझकर तदनुरूप कम्प्यूटर का भी मस्तिष्कीय विकास करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक प्रयास के साथ मशीनी अनुवाद में नवीन और अभूतपूर्व सफलतायें भी प्राप्त हो रही हैं। विभिन्न भाषाओं में किये जाने वाले मशीनी अनुवाद में शुद्धता का स्तर भी बढ़ रहा है।