हरड़ /हरीतकी के लाभ

हरड़ का परिचय:- यह त्रिफला (हरड़, बहेड़ा व आँवला ) में से एक है। हरीतकी दो प्रकार की होती है। छोटी हरड़ और बड़ी हरड़। छोटी हरड़ वस्तुतः हरीतकी के अपरिपक्व फल हैं। बड़ी हरड़ परिपक्व फल को कहा जाता है। हरीतकी में नमक को छोड़कर मधुरादि पाँचों रस वर्तमान होते हैं । किन्तु उनमें कषाय रस की प्रधानता होती है । इसलिए सर्वप्रथम इसे कषाय बताया गया है हरीतकी प्राय: सभी रोगों में प्रयुक्त होती है । स्वादु अम्ल रस होने से वात को, कटु और तिक्त रस होने से कफ को कषाय और मधुर होने से यह पित्त को दूर करती है बताया भी है. ..स्वादम्ल भावान् पवनं कटुतित्स्तयस्कफम्, ।
छोटी हरड़ अनेक समस्याओं में बड़ी हरड़ से अधिक लाभदायक होती है।

हरड़ के लाभ:-

👉पाचन संबंधी समस्याओं में यह रामबाण है।


👉मधुमेह ग्रस्त लोगों के लिये यह अति उपयोगी है। प्रतिदिन भोजन के पश्चात् छोटी हरड़ मुँह में लेकर कुछ देर चूसने से अथवा हरड़ पीसकर उसके चूर्ण के सेवन से अपच में बहुत लाभ होता है और शरीर व पेट का भारीपन भी दूर होता है।


👉जिन लोगों को भूख नहीं लगती अथवा भोजन के प्रति अरुचि हो जाती है उनके लिए भी हरड़ महत्त्वपूर्ण औषधि है। हरड़ के सेवन सै भूख लगने लगती है और व्यक्ति का शरीर पुष्ट होता है।

👉 आँख लाल हो गयी हो और किसी भी उपचार से ठीक न हो रही हो तो वह हरड़ के प्रयोग से ठीक हो सकती है। इसके लिये छोटी हरड़ पंसारी के यहाँ से लाकर एक ब रही पानी से धोकर। स्वच्छ पात्र में चार-पाँच हरड़ भिगो दें। सुबह छानकर उसी पानी से आँख धुलें। ऐसा दिन में कई बार करने से लम्बे समय से परेशान करने वाली आँख की लाली और उसमें होने वाली पीड़ा दूर हो जायेगी। आँख स्वस्थ हो जायेगी। स्वयं बनाये गये हरड़ के चूर्ण का प्रयोग भी कर सकते हैं। पानी से आँख धोने से पहले उसे महीन कपड़े से छानना न भूलें।
यह अनुभूत प्रयोग है।

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