स्वास्थ्य के लिए वरदान है अलसी (Flax seed)

अलसी का बीज

अलसी एक तिलहन फसल है। कुछ दशक पूर्व तक अलसी का खानपान में अधिक प्रयोग होता था। परन्तु आजकल अलसी का उत्पादन और प्रयोग दोनों कम हो गया है। अधिकांश घरों में अलसी अब किसी भी रूप में प्रयुक्त नहीं होती।

अलसी का परिचय

अलसी रबी की फसल है। गेहूँ के साथ तैयार होती है। इसके पौधे सामान्य सरसो के पौधे के बराबर होते हैं। प्रायः किसान इसको परम्परागत रूप से गेहूँ, चना, मटर आदि के साथ खेत में किनारे बोते हैं। इससे फसलों के उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अलसी का फूल नीचे रंग का होता है। इसका फल चने के दाने के बाराबर छोटा-छोटा होता है। एक फल में अनेक बीज होते हैं जो अधिकतम दो मिलीमीटर तक लम्बे एक मिलीमीटर चौड़े, चिपटे व चिकने होते हैं।
अलसी को काटकर किसान को स्वयं ही इसकी मड़ाई करनी पड़ती है क्योंकि इसके लिये अभी यन्त्र नहीं विकसित है। अधिक उत्पादन की स्थिति में इसकी बैलों द्वारा मड़ाई की जाती थी।

ओमेगा-3 का भण्डार

यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि शरीर के लिये अपरिहार्य तत्वों में से एक प्रमुख तत्व ओमेगा-3 फैटी एसिड (omega-3) अलसी में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
ओमेगा-3 हमारी मांसपेशियों में लचक बनाये रखने के लिये उत्तरदायी है। शरीर में लावण्य का कारक भी ओमेगा-3 है। इसके अभाव में मांसपेशियों का स्तम्भन, उनमें पीड़ा तथा त्वचा रोग होना सामान्य बात है। अलसी के सेवन से मानसिक तनाव तथा आँखों का तनाव भी दूर होता है क्योंकि ओमेगा-3 इस तनाव के विरुद्ध काम करता है।

आयुर्वेद में अलसी

आयुर्वेद के ग्रंथ भावप्रकाशनिघण्टु में अलसी के निम्न नाम प्राप्त होते हैं – अतसी, नीलपुष्पी, पार्वती, उमा, क्षुमा-

अतसी नीलपुष्पी च पार्वती स्यादुमा क्षुमा।

भावप्रकाश निघण्टु, धान्यवर्ग, ६६

अलसी गुण में मधुर, तिक्त, चिकनी, पाक में कटु, भारी, गर्म दृष्टि, वीर्य व वात, पित्त, कफनाशक है-

अतसी मधुरा तिक्ता स्निग्धा पाके कटुर्गुरुः।
उष्णा दृक्छुक्रवातघ्नी कफपित्तविनाशिनी।।

भावप्रकाश निघण्टु, धान्यवर्ग, ६६

अलसी खाने के लाभ

  • अलसी में ओमेगा-3 पाया जाता है जो शरीर के लिये एक अति आवश्यक तत्व है।
  • ओमेगा-3 पाये जाने के कारण यह अनेक रोगों को रोकने तथा उसके उपचार में उपयोगी है।
  • अलसी के सेवन से मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ मिलता है।
  • अलसी के सेवन से रक्तचाप ठीक रहता है और हृदयरोग में लाभ मिलता है।
  • अलसी के सेवन से शरीर में ओमेगा-3 की उचित मात्रा बनी रहती है जिससे त्वचारोग होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
  • अलसी एक्जिमा, दाद, खाज, खुजली में बहुत फायदेमन्द है।
  • सोरायसिस में इसका सेवन करने से रोग नियंत्रण में रहता है और ठीक होता है।
  • शाकाहारियों के लिये यह ओमेगा-3 का सर्वोत्तम स्रोत है। ऐसे में जिम करने वाले लोगों के लिये इसका सेवन बहुत लाभदायक है।
  • इसके सेवन से कोलेस्ट्राल कम होता है।
  • अलसी के सेवन से मोटापा कम होता है और शरीर सुडौल बनता है।
  • अलसी शरीर से जमे हुये मल को निकालती है तथा कब्ज दूर करती है।
  • इसके सेवन से विषाक्त पदार्थों का दोष दूर होता है।
  • अलसी का सेवन कैंसर की रोकथाम में सहायक है।
  • अलसी के सेवन से पाचन तन्त्र में सुधार होता है तथा शरीर पुष्ट होता है।
  • अलसी का सेवन बालों की स्निग्धता के लिये बहुत उपयोगी है। इसके सेवन से बालों का रंग तथा चमक बनी रहती है।
  • अलसी का सेवन गठिया को रोकता है।
  • यदि गठिया हो भी गया हो तो अलसी के सेवन से लाभ मिलता है।
  • अलसी के सेवन से बवासीर में भी लाभ मिलता है।
  • अलसी में एंटीआॅक्सीडेंट तत्व होता है जिससे हृदय स्वस्थ रहता है तथा व्यक्ति अवसाद से बचा रहता है।

अलसी की प्रयोगविधि

अलसी का बीज ही प्रयोग में लाया जाता है।
बीज को भूनकर दाल आदि में मिलाकर खाया जा सकता है या ऐसे ही फाँका जा सकता है। ध्यान रहे अलसी भूनकर पीसकर नहीं रखना चाहिये क्योंकि हवा के संपर्क में आकर वह खराब हो जाती है तथा उसमें महक आने लगती है। जिससे गुणवत्ता तो घटती ही है व्यक्ति खा भी नहीं पाता।

अलसी को भूनकर गुड़ के साथ लड्डू बनाया जा सकता है।

अलसी को भूनकर पीसकर भी लड्डू बनाया जाता है और उसका सेवन किया जाता है।

अलसी के तेल का भी सेवन किया जा सकता है। आजकल इसके तेल के और चूर्ण के कैप्सूल भी उपलब्ध है।

अलसी के तेल को सरसो के तेल में मिलाकर खाया जा सकता है।

अलसी के सेवन में सावधानी

अलसी उष्ण प्रकृति की होती है। अतः बहुत गर्मी में सेवन से बचना चाहिए।

अलसी को कच्चा न खायें। सदैव भूनकर ही खायें।
अलसी को होरसके तो ठंड में ही सेवन करना चाहिए।
एक साथ अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिये, उससे जस्त हो सकती है। क्योंकि अलसी रेचक होती है।

गर्भवती महिलाओं को भी अलसी का सेवन नहीं करना चाहिये अन्यथा गर्भपात हो सकता है।
अलसी खाने के बाद पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है।

अलसी को संतुलित मात्रा में भोजन का अंग बनाना वर्तमान में स्वास्थ के लिए बहुत आवश्यक है।