सिरदर्द, बदनदर्द, थकान और हरारत में क्या करें?

जीवनशैली में हुये परिवर्तन एवं मौसम में हुये अचानक परिवर्तन, गल खानपान, नींद में बाधा, एक ही स्थिति में बैठकर देर से काम करने से सिरदर्द, शरीर में टूटने जैसा दर्द, थकान और हरारत आदि आज आम समस्या है। इन सबके साथ अनेक लोग जीवन जीते रहते हैं उन्हें इस समस्या का कोई उचित कारगर समाधान नहीं मिलता। किसी के पूरे सिर में दर्द होता है, किसी के आधेसिर में या, सिर के किसी भाग में और किसी को माथे पर दर्द होता है। थकान और हरारत में सबसे अधिक दर्श कन्धों एवं पैर के निचले हिस्सों तथा जंघाओं में होता है।
इन समस्याओं से हम अपनी जीवनशैली में थोड़ा सा परिवर्तन करके मुक्त हो सकते हैं । ऐसी समस्या से तुरन्त आराम पाने के लिये कतिपय उपाय हैं जिनको हम बिना किसी दूसरे की सहायता से घर में ही कर सकते हैं।

मालिश/अभ्यंग

थकान एवं अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण होंने वाली किसी भी प्रकार की पीड़ा में मालिश सबसे उत्तम समाधान है। मालिश करवाने से थकान उतर जाती है और मांसपेशियाँ तनावमुक्त होती हैं जिससे रक्तसंचार सुचारु रूप से होता है और व्यक्ति को आराम मिलता है।
आयुर्वेद के ग्रन्थ अष्टाङ्गहृदयम् में प्रतिदिन मालिश का निर्देश है। यदि प्रतिदिन सम्भव न हो तो साप्ताहिक मालिश की व्यवस्था करनी चाहिये।

शीतल अथवा गुनगुने पानी का प्रयोग

थकान के कारण उत्पन्न विभिन्न प्रकार के दर्द में मौसम के अनुरूप ठण्डे अथवा गुनगुने पानी का प्रयोग पीने, स्नान करने तथा प्रभावित अंग को धोने हेतु करना चाहिये। शीतऋतु में गुनगुने पानी का प्रयोग और ग्रीष्म में ठण्डे पानी का प्रयोग अच्छा रहता है।
सिरदर्द आदि में गुनगुना पानी पीने से लाभ मिलता है।
ठण्डे अथवा गुनगुने पानी को बाल्टी में भरकर उसमें पैर रखने से बहुत लाभ मिलता है।
शीतल तथा उष्ण जल का स्नान भी बहुत लाभदायक है। इससे पूरे शरीर में स्फूर्ति आती है।

भाप लेना/ वाष्पस्नान

थकान, हरारत, किसी अंग में पीड़ा आदि दूर करने में वाष्पस्नान बहुत सहायक है। भाप से स्नान करने या उस विशेष अंग को भाप देने से पीड़ा दूर होती है और शरीर में स्फूर्ति आती है।
वाष्पस्नान के लिये पात्र आदि के व्यवस्था करनी पड़ती है, जो एक जटिल कार्य है। अतः इसकी सरल विधि यह ब् ही है कि ऐसा पानी जिसमें भाप निकलने लगा हो, उसमें तौलिया आदि भिगोकर उसे सेंकाई की जाय। यह भी लाभदायक है। इससे पूरा शरीर तरोताजा महसूस होता है।

अजवायन का प्रयोग

शरीर में अथवा शरीर के किसी भी अंग में थकानजनित, गलत खानपान-दिनचर्याजनित पीड़ा को अजवायन के प्रयोग द्वारा दूर किया जा सकता है।
अजवायन उबालकर हल्का सा काला नमक, सेंधा नमक या इन दोनों के न उपलब्ध होंने से साधारण नमक डालकर पीते ही दस मिनट के अन्दर प्रभाव दिखाई पड़ने लगता है। धीरे-धीरे पीड़ा दूर हो जाती है।

सुगन्ध-फूलों एवं फलों की

सिरदर्द, अधकपारी के दर्द में सुगन्धित फूलों बेला, मोतिया, शेफालिका( हरसिंगार), रातरानी, रजनीगन्धा आदि फूलों की सुगन्ध बहुत लाभ पहुँचाती है। स्वयं को प्रिय लगने वाली सुगन्ध को नियमित सूँघने से अधकपारी/ आधाशीशी की पीड़ा दूर होती है। व्यक्ति पूरी तरह मुक्त भी हो सकता है इस पीड़ा से।
नींबू, सन्तरा, प्राकृतिक रूप से पके आम की सुगन्धित प्रजातियों को सूँघने से सिरदर्द में आराम मिलता है और मन:स्थिति ठीक होती है।

तुलसी, पुदीना, तेजपत्ता

सिरदर्द में तुलसी की पत्ती, पुदीना की पत्ती और तेजपत्ता सूँघने से लाभ मिलता है।
तुलसी की पत्ती, पुदीना की पत्ती तथा तेजपता एकसाथ या अलग-अलग उबालकर पीने से सिरदर्द, बदनदर्द और थकान में आराम मिलता है।

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