सावधान रहें ‘ज़ूम’ एप से

कोविड-19 के संक्रमणकाल में सभी एकान्तवास कर रहे हैं। ऐसे में सभी शासकीय एवं सामाजिक गतिविधियाँ ठप हैं। लॉकडाउन कबतक चलेगा इस विषय में अनिश्चितता है। ऐसे में विभिन्न व्यक्ति, संस्थान एवं प्रतिष्ठान अपने कार्यों के लिए। बैठक आदि के लिये ‘ज़ूम’ एप का प्रयोग कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि जू़म एप चीन का उत्पाद है। ऐसे अन्य कई एप भी हैं जो चीन से संचालित होते हैं तथा व्यक्तिगत व राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु खतरा है। टिक-टाक, यूसी ब्राउजर आदि ऐसा ही है। विश्व के अनेक देशों ने इनको लेकर चिन्ता जतायी है तथा अपने लोगों को सावधान किया है।

इन एप के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी ए लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधी बातें तक दूसरे देश तक पहुंच सकती हैं। यही नहीं इनके माध्यम से आपकी गतिविधियों गूगल पर आप के द्वारा खोजी गयी जानकारियों, यू-ट्यूब पर देखे गये वीडियो, आपके फोन में सुरक्षित फोन नौबर, फेसबुक पर आप के द्वारा की गयी सारी गतिविधियों की जानकारी बहुत ही सरलता से चोरी हो सकती है। आपके आवागमन आदि पर भी इसके माध्यम से नजर रखी जा सकती है।

यदि हम विस्तार से सोचेंगे तो पायेंगे कि जितना दिखायी पड़ रहा है खतरा कहीं उससे बड़ा है।

पहली बात है कि चीन जैसे देश पर जहाँ मीडिया को तनिक भी स्वतंत्रता नहीं है, उतना विश्वास नहीं किया जा सकता। जिस देश की गतिविधियां ही रहस्यात्मक हों उसके उत्पादों पर विश्वास करना मूर्खता है।

जूम जप से खतरे को देखते हुये भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी चेतावनी जारी की है और कहा है कि मीटिंग आदि के लिये इसका उपयोग न करें।

कोरोना के कारण हुये लाॅकडाउन में बहुत सी शिक्षण संस्थाएं व व्यापारिक प्रतिष्ठान विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों से संवाद हेतु ज़ूम का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में सावधानी अपेक्षित हे। क्योंकि न चाहते हुये भी व्यक्ति को जूम का प्रयोग करना पड़ रहा है।

शासन को सख्त दिशानिर्देश जारी करने चाहिये साथ ही विकल्प भी सुझाना चाहिये जो कि अपेक्षाकृत सुरक्षित हो।

सोशल मीडिया पर सुरक्षा को लेकर सदा प्रश्न होता रहा है। समय-समय पर जानकारी चोरी होने और बेचे जाने के भी समाचार आते हैं। तकनीकि की डिजिटल क्रांति के ये सब दुष्परिणाम हैं।

समस्या यह है कि अधिकांश जनता इन सब खतरों से अनभिज्ञ है। इसलिए वह इन समस्त उपलब्ध साधनों का अनजाने में प्रयोग कर रही है। इसलिये डिजिटल क्रांति के साथ इसकै5प्रयोग के विषम में जागरूकता भी अपेक्षित है। क्योंकि प्रत्येक नागरिक राष्ट्र की पूंजी है। किसी टी भी जानकारी चोरी होना अप्रत्यक्ष रूप से देश हेतु संकट है।

हमारी सरकार को इस पक्ष पर ध्यान देना चाहिए और भारत में स्वदेशी तकनीकि के निर्माण पर बल देना चाहिए। यदि उतत्म, सक्षम और सुविधापूर्ण स्वदेशी एप होंगे तो जनता जूम जैसे खतरनाक और संदेहास्पद एप की ओर नहीं जायेगी।