संक्रमित कूड़ा-कचरा प्रबंधन

इस समय हम एक भयंकर महामारी से से जूझ रहा है। विश्व में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु तथा संक्रमित व्यक्तियों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। बचाव के लिये मास्क का प्रयोग आवश्यक हो गया है। अधिकतर मास्क एक से दो बार ही प्रयोग में लाये जा सकते हैं। चिकित्सालयों में प्रयुक्त होने वाले मास्क का तो एक बार ही उपयोग होता है। उपयोग के बाद ये मास्क कूड़े में फेंक दिये जाते हैं।

मास्क के अतिरिक्त कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की चिकित्सा में और उनको अलग रखने में अनेक वस्तुओं का प्रयोग होता है। वे वस्तुएं प्रयोग के बाद कूड़े में डाली जाती हैं। चिकित्सालयों में तो विभिन्न प्रकार के कूड़े – कचड़े के निस्तारण के लिये बहुत सजगता बरती जाती है और उनको अलग रखा जाता है परंतु समाज में अभी भी इस संबंध में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। सुविधाओं का अभाव होने के कारण भी सभी प्रकार का कचरा एक साथ बाहर जाता है। बाहर जाकर वह समाज में संक्रमण का कारण हो सकता है।

इस संक्रमण काल के कचरे के प्रबंधन के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विशेष दिशानिर्देश दिया है। जिसके तहत तहत कोविड-19 के कूड़े-कचड़े का निस्तारण ठोस कचरा प्रबंधन नियम – 2016 (Solid waste management rules-2016) और ज्यादा व-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन नियम (Bio medical waste management rules) के अनुसार करना चाहिए।

भारत सरकार ने भी इस संदर्भ में दिशानिर्देश जारी किया है। सरकार के निर्देश के अनुसार कोविड-19 के कूड़े-कचड़े को अलग-अलग रंगों के दो परत वाली प्लास्टिक की थैलियों अथवा डिब्बों में कोविड-19 की पर्ची चिपकाकर बंद करना चाहिए। इस कूड़े को ढोने वाले ट्राली आदि पर भी साफ-साफ कोविड-19 लिखा होना चाहिए। ताकि लोग देखते ही सतर्क रहें। साथ ही कोविड-19 का कूड़ा-कचड़ा उठाने वाले सफाईकर्मचारियों को अन्य कार्यों में नहीं लगाने के भी निर्देश दिये गये हैं।

सामान्यतः जैव-चिकित्सीय कचरे को उच्च तापमान पय जला दिया जाता है। कोविड-19 के कचरे का निस्तारण ऐेसे ही संभव है।

परन्तु यहाँ मुख्य चुनौती इसके निस्तारण से जुड़े लोगों के सामने भी है उनको उचित मात्रा में और उपयुक्त सुरक्षा उपकरण आदि नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में वे अपने जीवन को ताक पर रखकर इस कार्य में लगे हुये हैं।

घरों में तो पहले से ही कूड़े-कचड़े की प्रबंधन व्यवस्था ठीक नहीं है। प्रायः लोग एक साथ सभी प्रकार का कूड़ा फेकने के अभ्यस्त हैं। यही कारण है कि नगरीय पशुओं के पेट में बहुत अधिक मात्रा में प्लास्टिक पाये जाने का समाचार समय-समय पर आता रहता है। लोग सुई, पिन, ब्लेड और सैनिटरी नैपकिन जैसी चीजें एक साथ कूड़े में डालते हैं जिससे उसके संपर्क में आने वाले पशुओं और मनुष्यों को अनेक संकटों का सामाना करना पड़ता है।

ऐसे में आज जब कोविड-19 सबसे समक्ष चुनौती है। और किसी को यह भी नहीं पता कि संक्रमण किस ओर से आयेगा। घरों कूड़े-कचड़े का सम्यक् प्रबंधन एवं इसके विषय में जागरूकता समय की माँग है। आज आवश्यकता है कि कोविड-19 से जुड़े कचड़े एवं बाहर से लायी गयी वस्तुओं के पैकेट आदि को कम से कम 72 घंटे तक अलग रखें। हो सकें तो धूप में प्लास्टिक के थैली में बंद करके रखें। उसके बाद ही कहीं सार्वजानिक स्थान पर उसका निस्तारण करें।

ध्यान रहे सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और बचाव ही सबसे बड़ी स्वास्थ्य – रक्षा है।

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