व्रत का सर्वोत्तम आहार- रामदाना/राजगिरा/चौलाई का बीज/ Amaranth

रामदाना व रामदाना का लड्डू

चौलाई/ चौराई के साग से सभी परिचित हैं। हरी साग चौलाई के नाम से जानी जाती है और लाल पत्ते वाले शाक को लाल साग अथवा मेर्सा कहते हैं। इसके देश में विभिन्न नाम प्रचलित हैं।

चौलाई का साग अपने गुणों के कारण प्रायः सभी का प्रिय होता है। परन्तु बहुत कम लोग जानते हैं की चौलाई के बीज को ही रामदाना कहते हैं और वह संसार के सुपर फूड में गिना जाता है। यह विश्व के प्राचीनतम खाद्यान्नों में से एक है। यह सामान्य अनाजों गेहूँ, धान, मक्का आदि की अपेक्षा कई गुणा पौष्टिक है। चौलाई के साग और चौलाई के बीज दोनों में अद्भुत एंटीऑक्सीडेण्ट क्षमता और प्रचुर प्रोटीन पायी जाती है। यह बच्चों, युवाओं तथा वृद्धों के लिये समान रूप से लाभकारी तथा सुपाच्य आहार है।

चौलाई का बीज भून लिया जाता है। फिर उसको ऐसे ही चबेना जैसे चबाकर खाया जाता है अथवा लड्डू बनाकर, दूध में डालकर, हलवा बनाकर। जिस भी रूप में चौलाई का बीज खाया जाय वह बहुत पौष्टिक होता है। वृद्धों और बढ़ते बच्चों के लिये यह बहुत लाभकारी है। बाजार में चौलाई के बने-बनाये लड्डू भी मिलते हैं। रामदाने का लड्डू, हलवा, खीर, लप्सी आदि अनेक व्यंजन बनाये जाते हैं। देश के कुछ भागों में इसकी रोटी भी बनायी जाती है।

रामदाना में विटामिन

विटामिन ए

विटामिन सी

विटामिन ई

जिंक

रामदाना में ग्लूटेन नहीं पाया जाता है अतः इसे वे लोग भी खा सकते हैं जो ग्लूटेन में प्रति संवेदनशील हैं। इसको खाने से पेट भर जाता है तथा अपच भी नहीं होती । यह भूख को रोकता है तथा शरीर को पोषण भी देता है। इसी लिये यह व्रत- उपवास और डाइटिंग के लिये अच्छा आहार है।

रामदाना के सेवन से कोलेस्ट्राल व रक्तचाप नियन्त्रण में रहता है और पाचन-तन्त्र में सुधार आता है।
शाकाहारियों के लिये रामदाना सर्वोत्तम आहार है क्योंकि प्रति 100 ग्राम रामदाना के सेवन से लगभग 450 किग्रा कैलोरी प्राप्त होती है।

परिस्थितिवश या किसी अन्य कारण से समय पर भोजन न कर पाने वाले लोगों के लिये रामदाना इन्स्टैंट फूड -मैगी आदि का पौष्टिक विकल्प है।

सुपाच्य, हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट तथा भूनकर रखने पर क्षणभर में दूध आदि में डालकर खाने खाने योग्य होने के कारण रामदाना व्रत-उपवास के लिये सर्वोत्तम विकल्प है। जो सहजता से उपलब्ध है।

आज देश का जागरूक वर्ग पुनः हमारे प्राचीन खाद्य रामदाना की ओर लौट रहा है तथा इस ’जादुई बीज’ के जादू से लाभान्वित हो रहा है।