विषाणु संक्रमण : हमारा व्यवहार एवं सावधानी

आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी झेल रहा है। जीवन में गतिहीनता आ गयी है। चतुर्दिक् भय का वातावरण है। विश्व के समस्त देश कोरोना के संक्रमण से अपने नागरिकों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। आवागमन और परस्पर मेलजोल बाधित है।समय-समय पर मानव सभ्यता को महामारियों का सामना करना पड़ा है। आज पूरा विश्व एक गाँव बन गया है। अतः कोरोना का प्रकोप हर कोने में है।हमारे देश में ऐसी ही महामारियों और संपर्कजन्य रोगों से बचने के लिए अनेक उपाय लोकव्यवहार का अंग बने। स्वच्छता संबंधी क्रियाकलापों द्वारा हम इस बात को समझ सकते हैं कि हमारे पूर्वज कितने जागरुक थे इन विषयों में।संपर्क में आने से होने वाले रोगों संसर्गजन्य रोगों के प्रसार विषय में महर्षि सुश्रुत ने कहा है कि –

प्रसङ्गाद्गात्रसंस्पर्शान्निश्वासात् सहभोजनात्।

सहशय्यासनाच्चापि वस्त्रमाल्यानुलेपनात्।।

कुष्ठं ज्वरश्च शोषश्च नेत्राभिष्यन्द एव च।

औपसर्गिकरोगाश्च संक्रामन्ति नरान्नरम्।।

– महर्षि सुश्रुत (निदानस्थान)

यौनसंपर्क, शरीर से संपर्क, हाथ मिलाना, छोटी बूंदों से संक्रमण, पहले से संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन करना, संक्रमित व्यक्ति के साथ बैठना या सोना, संक्रमित व्यक्तियों के कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन और गहनों का उपयोग आदि से संक्रमण होता है।

कुष्ठ, ज्वर अर्थात् बुखार और फेफड़ों व आँखों के रोग परस्पर संचारी होते हैं अर्थात् संपर्क से होते हैं।

अतः प्रत्येक के लिए एकान्तवास (सेल्फ क्वारंटाइन) सबसे उपयुक्त बचाव विधि है।

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य छोटे-छोटे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर सरलतापूर्वक स्वस्थ जीवन जीते हुये कोरोना के संक्रमण से बचा जा सकता है। –

1. बार-बार साबुन आदि से हाथ धुलना।

2. अनावश्यक बाहर न निकलना।

3. बाहर से आकर साबुन से बाल धुलकर स्थान करना।

4. कोई भी वस्तु बाहर से लाने पर उसे साबुन और नमक मिले पानी में कुछ देर डुबोकर रखने के बाद धुलना।

5. बाहरी दरवाजे के स्पर्श होने वाले स्थानों को साबुत से धुलना।

6. यदि संभव है तो 10-15 मिनट धूप में बैठना।

सभी कपड़ों को धूप में सुखाना।

7. चप्पल को हर परिस्थिति में घर के बाहर निकालना। यदि संभव न हो तो उसे भी साबुन में भिगोकर धुलना।

स्वास्थ रक्षा के उपाय:-

यह ऋतुपरिवर्तन का समय है। इसलिए जुकाम, ज्वर आदि होने की संभावना रहती है। इसलिए –

1. दिन में कम से कम एक बार दो चुटकी अजवायन उबालकर पियें इससे पंखे आदि की कृत्रिम हवा के कारण शरीर में रहने वाली थकान दूर होगी।

2.तेजपत्ता,लौंग,दालचीनी, इलायची, कालीमिर्च आदि का काढ़ा बनाकर एक साथ या अलग-अलग अपनी सुविधा के अनुसार सेवन करें।

3. चावल पकाते समय बड़ी इलायची, काली मिर्च और तेजपत्ता हो सके तो डालें। इससे आप जुकाम से बचे रहेंगे।

4.  गुनगुना पानी पियें। फ्रिज का प्रयोग बिलकुल न करें।

5.घर पर ही व्यायाम और योग करें।

6.संभव हो तो कोई पसंद की पुस्तक पढ़ें।

7.जुकाम का अनुभव होने पर यदि घर का सरसो का तेल उपलब्ध हो तो उसे दो बूँद नाक में लगायें। न उपलब्ध होने पर नारियल अथवा बादाम का तेल अथवा देशी घी भी लगा सकते हैं।

8. ध्यान रखें कि जब आपको गर्मी अधिक लग रही हो तब स्नान न करें। इससे जुकाम होने का डर तो रहता ही है। पित्ती भी निकल सकती है और चेचक की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

9. स्नान करते समय पहले जल पैर पर डालें।

10. सुपाच्य भोजन करें। सप्ताह में एक दिन या एक समय उपवास भी उत्तम ह8।

11.मधुर संगीत सुनें।

12. मेथी और हल्दी का सेवन भोजन में बढ़ा दें।

13. फल, सब्जी व दूध का पैकेट लायें तो पहले उन्हें धुलें और पकाकर ही खायें।

14. बाहर का पका कोई भी खाद्य पदार्थ न खायें।

15. घर के वृद्धों का विशेष ध्यान रखें।

यदि हम आप सभी सावधान रहेंगे तो संक्रमण काल बीत जायेगा और सभी स्वस्थ रहेंगे।

बचाव ही उपाय है।

आयु की रक्षा। शरीर की सुरक्षा हमारा धर्म है। हमारा परम् कर्तव्य है।

स्वस्थ रहें।

सबल रहें।

समर्थ रहें।

प्रसन्न रहें।

🙏शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्

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