रुपये के नोट हो सकते हैं वायरस के वाहक

आज जब सम्पूर्ण विश्व कोविड-19के संक्रमण से जूझ रहा है। बचाव के लिए अनेक उपाय किये जा रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि व्यक्ति स्वयं भी सजग रहे और ऐसे किसी भी वस्तु से सावधान रहे जो कोरोना के संक्रमण को बढ़ाने और फैलाने का कारक बन सकते हैं।

सामान्यतः आज सभी प्रमुख बातों को लेकर सावधान हैं परन्तु कुछ ऐसे प्रक्षेप भी हैं जिनको लेकर आज भी लोग उतना सावधान नहीं हो पा रहे हैं। या यूं कहें कि जिन पर ध्यान नहीं दे पा रहे। परन्तु ये पक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

पाँच से लेकर पाँच सौ और दो हजार तक की नोट हमारे देश में प्रचलित है। अभी भी भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम नकद भुगतान ही है जिसमें नोटों का प्रयोग होता है। ये नोट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जाते हैं और आवागमन की एक जटिल शृंखला बनाते हैं। ऐसे में यदि एक व्यक्ति भी इस किसी विषाणु या जीवाणु से ग्रस्त हुआ तो वह अनेक लोगों को ग्रस्त कर देगा। क्योंकि उसके द्वारा प्रयुक्त नोट अनेक लोगों के हाथों, जेबों और घरों तक पहुंचेंगे। जिससे संक्रमण की संभावना कई गुणा बढ़ जायेगी।

यही नहीं सिक्कों का भी हमारे यहाँ प्रयोग होता है। हालांकि ये धातु के होते हैं इसलिये इनका शोधन सरल है। फिर भी इनके प्रयोग में भी अनेक बार बहुत असावधानी देखी जाती है। अनेक बार बच्चे सिक्कों को मुँह में भी डाल लेते हैं। जिससे वे गले में अटकन सकते हैं और प्राण संकट पड़ सकता है। यही नहीं उन सिक्कों पर चिपके विभिन्न बीमारियों के बैक्टीरिया – वायरस सरलता से शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं और बीमार बनाते हैं।

अभी तो संक्रमण काल है पर सामान्य समय में भी समाज में नोटों और सिक्कों के प्रयोग में सावधानी अपेक्षित है। अनेक बार देखा जाता है कि दान-दक्षिणा, भोज आदि में लोग रुपयों – पैसों को थाली में ही रख देते हैं अथवा खाते समय हाथ में देते हैं।

आवश्यक है कि नोटों और सिक्कों का व्यवहार करने में सावधानी बरतें और उनके छूने के बाद हाथ धुलना अपना स्वभाव बनायें। पर्स, वालेट, बैग आदि को भी समय-समय पर संक्रमण मुक्त करते रहें।

आजकल तो डिजिटल भुगतानभी प्रचलन में आ गया है। यथासम्भव डिजिटल भुगतान करें। क्योंकि डेबिट-क्रेडिट कार्ड सरलता से संक्रमणमुक्त किये जा सकते हैं और ये आपके पास ही रहते हैं अतः इनमें दूसरों से आने वाले संक्रमण की संभावना न्यूनतम होती है।

यह संक्रमणकाल हमारे लिये एक जागरण और चेतावनी भी है कि हम भविष्य में भी स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहें तथा एक स्वच्छ जीवनशैली अपनायें जिसके किसी भी प्रकार के संक्रमण की संभावना न्यूनतम हो।

सावधान रहें… स्वच्छ रहें… स्वस्थ रहें

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