रामायण काकावीन: इण्डोनेशिया की रामकथा

रामायण काकावीन: परिचय 

इण्डोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित विशाल देश है। यह विश्व चौथी बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके साथ ही य यह सबसे बड़ा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश भी है। इस देश में 1700 से अधिक छोटे-बड़े द्वीप हैं। इसकी राजधानी जकार्ता है।

पहले इस क्षेत्र को दीपान्तर भारत के नाम से जाना जाता था। इण्डोनेशिया शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग इण्डोनेशिया के शिक्षामंत्री – की हजर देवान्तर (1889-1959) ने किया। अभी भी यहाँ की बहासा जावा में दीपान्तर भारतवाची एक शब्द है-नुसान्तर जिसका अर्थ बृहद् इण्डोनेशिया है।

इण्डोनेशिया में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। वहाँ की राष्ट्रीय भाषा बहासा इण्डोनेशिया है। इसके अतिरिक्त वहाँ बहासा जावा, बहासा बाली, बहासा कावी, अरबी. और अंग्रेजी बोली जाती है। बहासा जावा और कावी वहाँ की बहुत ही महत्वपूर्ण साहित्यिक भाषाएँ है। बहासा कावी इंडोनेशिया की प्राचीन भाषा है । इसकी लिपि ब्राह्मी से मिलती है।

इंडोनेशिया में प्रथम शताब्दी से ही हिन्दु राजाओं के राज्य की जानकारी प्राप्त होती है। वहाँ विभिन्न राजवंशों ने शासन किया है –

श्रीविजय राजवंश (तीसरी से चौदहवीं शताब्दी)
शैलेन्द्र राजवंश(आठवीं-नौवीं शताब्दी)
माताराम राजवंश (669-1579)
केदिरि राजवंश(1045-1221)
सिंहश्री राजवंश(1222-1292)
मजापहित राजवंश (1293-1500)

इंडोनेशिया का राष्ट्रीय चिह्न गरुड है और उसके नीचे लिखा है ‘भिन्नेक तुंग्गल इक’ (Bhinneka Tunggal Eka) अर्थात् अनेकता में एकता।

रामायण काकावीन कावी भाषा में रचित है। काकावीन का शाब्दिक अर्थ है महाकाव्यरामायण काकावीन
कावी भाषा में रचित विभिन्न ग्रंथों में सर्वोपरि है। इसका प्रचार-प्रसार इंडोनेशिया में श्रुति परम्परा द्वारा हुआ है। यह जनमानस में समादृत ग्रंथ है।

इंडोनेशिया में रामायण काकावीन और काकावीन भारतयुद्ध जो कि वहाँ का महाभारत है। दोनों ग्रंथों के कथाप्रसंगों का भित्ति-उत्कीर्णन विभिन्न मंदिरों के परिसरों में प्राप्त होता है। जिनमें प्रमुख रूप उल्लेखनीय है:-

प्रम्बनान परिसर
पानतारान मंदिर (Panataran/Penataran)
बाली द्वीपस्थ मंदिर

रामायण काकावीन के अध्येता हूयकास (Hooykaas) के अनुसार वर्तमान रामायण काकावीन का अनेक बार संशोधन किया गया  उसके बाद यह रूप बना जो हमें उपलब्ध होता है।
विद्वानों का कहना है कि बालितुन शासनकाल (नौंवी शती) में रामायण काकाविन की रचना से पूर्व भी रामायण एवं महाभारत की कथायें लोक में प्रचलित थीं।


छायापुत्तलिका (Shadow puppet) जिसे वायान (wayan) कहते हैं, द्वारा अभिनय एवं नृत्य प्रदर्शन रामायण एवं महाभारत की कथाओं के आधार पर होता था। इसके अतिरिक्त मुखौटाधारी नर्तकों द्वारा रामायण एवं महाभारत की कथाओं का मंचन भी होता था।


वायान पर्व (Wayan Parwa) छाया पुत्तलिका अभिनय (shadow pupoet play) एवं वायान वांग (Wayan wong) – छाया पुत्तलिका नृत्याभिनय (shadow puppert dance and drama) के माध्यम से रामायण एवं महाभारत की कथायें लोक में प्रचलित थीं ।आज भी ये माध्यम लोकानुरंजन करते हैं।

बालितुन शासन के एक अभिलेख में उल्लिखित है:-
मनोरंजन हेतु आग्रह किया गया था। भगवान के प्रतिनिधि (पुतलीवाले) ने युवा भीम द्वारा कीचक वध की कथा गायी एवं मंचन किया। फिर रामकथा हेतु भी निवेदन किया गया।”

इससे ज्ञात होता है कि रामायण एवं महाभारत की कथाओं का समाज में प्रचलन था।

रामायण काकाविन का कालनिर्धारण

एच कर्न (H. KERN) का व्याकरण के आधार पर मत है कि रामायण काकावीन की रचना 13वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुयी,
जवैटमल्दर (Zoetmulder)  11-12 वीं शताब्दी मानते हैं।
पोयरबतजरक (Poerbatjaraka) के अनुसार 930 ई. से पूर्व बालितुन शासनकाल में यह ग्रंथ रचा गया। अतः इसका समय नौंवी शताब्दी माना जा सकता है।

रामायण काकावीन के रचनाकार

परम्परा के अनुसार रामायण काकावीन का रचनाकार योगीश्वर को माना जाता है। बाली की परम्परा ववतेकन (wawatekan) के अनुसार योगीश्वर ही रचयिता हैं
विद्वान् जोयेतमुलदर (Zoetmulder) इस संदर्भ में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं जबकि पोयेरबतजलक (Poerbatjaraka) योगीश्वर के रचनाकार होने से असहमत हैं क्योंकि पूरे ग्रंथ में एक ही बार योगीश्वर आया है और उससे यह स्पष्ट नहीं होता कि वहाँ वह शब्द रचनाकार के लिये प्रयुक्त हुआ है। परन्तु परम्परा योगीश्वर को रचनाकार मानती है अतः इसके रचनाकार योगीश्वर हैं।
रामायण काकावीन पर विद्वानों के अनुसार वाल्मीकि रामायण से अधिक प्रभाव भट्टिकाव्य काव्य का है। इस ग्रंथ की कथायोजना महाकाव्य जैसी है। इसके भाषा से ज्ञात होता है कि इसके रचनाकार/रचनाकारों का संस्कृत भाषा एवं छन्दशास्त्र का उन्नत ज्ञान था। इसकी कथाशैली पंचतंत्र, कथासरित्सागर, हितोपदेश के कथाशैली से साम्य रखती है।

इण्डोनेशिया के अन्य रामकथाविषयक ग्रंथ

उत्तरकाण्ड, चरित रामायण अथवा कवि जानकी और
बाली में प्राप्त 59 श्लोकों की अनुष्टुप् छन्द में रचित संक्षिप्त रामकथा रामायण काकावीन से पूर्ववर्ती साहित्य है जो इंडोनेशिया में प्राप्त होता है।
परवर्ती साहित्य में सेरतकाण्ड, रामकेलिंग, सेरी राम, सुमनसांतक और अर्जुन विजय प्रमुख हैं।

इंडोनेशिया में समय-समय पर रामायण काकावीन के प्रसंगों को चित्रित कर डाक-टिकट भी जारी किया गया है जैसे हनुमान द्वारा लंकादहन(24 जनवरी 2016), धनुष की प्रत्यंचाचढ़ाये भगवान् श्रीराम(15 जून 1962), श्रीराम, देवी सीता, हनुमान, जटायु, रावण मारीच, राम द्वारा मारीच वध आदि ।

इसप्रकार दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित देश इंडोनेशिया में रामकथा रामायण काकावीन का बहुत प्रचार-प्रसार है। वहाँ इसे मुक्ति के ग्रंथ के रूप में मान्यत