मकोय Black Nightshade भटकोइयां के औषधीय लाभ

 

के लाभ

मकोय के लाभ 

मकोय का पौधा हमारे परिवेश में सर्वत्र पाया जाता है। इसे संस्कृत में काकमाची कहते हैं। यह मकोइया और भटकैंया नाम से जाना जाता है।

प्रायः यह अपने आप उगने वाला पौधा है। प्रायः पूरे वर्ष फूलता-फलता है। इसके फूल मिर्च की भाँति छोटे-छोटे होते हैं तथा छोटे-छोटे हरे फल होते हैं जो पककर गाढ़े जामुनी और काले रंग के हो जाते हैं। फल के अंदर छोटे-छोटे बहुत से बीज होते हैं। पका फल खाने में मीठा होता है।

कच्चा फल बहुत ही कसैला लगता है।


आयुर्वेद के ग्रंथ अष्टांगहृदयम् में काकमाची अर्थात् मकोय का वर्णन शाकवर्ग के अंतर्गत प्राप्त होता है। वहाँ इसके गुणों का वर्णन करते हुये कहा गया है कि मकोय की पत्तियों का शाक वात, पित्त एवं कफ इन तीनों दोषों का शमन करने वाल, कुष्ठरोग का विनाशक, वीर्यवर्धक, कुछ उष्णवीर्य युक्त, रसायन गुणों से युक्त, सर (अर्थात् मल को सरकाने वाला, कब्ज दूर करने वाला) तथा स्वरयंत्र (कंठ आदि व) के लिये हितकर है।


हन्ति दोषत्रयं कुष्ठं वृष्या सोष्णा रसायनी। काकमाची सरा स्वर्या (अष्टांगहृदयम् 1/6/74)


आयुर्वेद के एक अन्य ग्रंथ ‘भावप्रकाश‘ में मकोय को स्निग्ध, गरम, स्वर को उत्तम करने वाली, वीर्य को बढ़ाने वाली, कड़वी, रसायनरूप, चरपरी, नेत्रों हेतु हितकारी, तीनों दोषों, सूजन कोढ़, बवासीर, ज्वर, प्रमेह, हिचकी, वमन अर्थात् उल्टी तथा हृदयरोग विनाशक है।


काकमाची त्रिदोषघ्नी स्निग्धोष्णा स्वरशुक्रदा।
तिक्त रसायनी शोथकुष्ठार्शोज्वरमेहजित्।
कटुर्नेत्रहिता हिक्काच्छर्दिहृद्रोगनाशिनी।।
(भावप्रकाश, खंड1, 230-31)

मकोय के अनुभूत लाभ:-


1. मकोय के पत्तों का साग बनाकर खाया जा सकता है।
2. जुकाम में इसका काढ़ा पीना हितकारी होता है।
3. मकोय के पंचांग- जड़, तना, पत्ती, फूल, फल को सुखाकर कूटकर, छानकर रख लेने से प्रतिदिन एक छोटा चम्मच गुनगुने पानी के साथ ग्रहण करने पर मधुमेह नियंत्रित रहता है।
4. मधुमेह में मकोय का साग खाना लाभप्रद होता है।
5. मकोय मूत्राशय के लिए बहुत लाभदायक है इसका सेवन मूत्राशय की अश्मरी अर्थात् पथरी को समाप्त करके उसे स्वस्थ बनाता है।
6. हृदय रोगियों के लिए यह महारसायन है। यह हृदय की गति को नियंत्रित रखने में सहायक है।
7. किसी भी प्रकार के त्वचा रोग में मकोय का साग खाना अथवा मकोय का फल खाना बहुत ही लाभदायक है।
8. यदि किसी की तिल्ली बढ़ गयी हो या किसी कारण से पाचनतंत्र कमजोर हो गया हो तो लगातार एक माह मकोय के पके फलों के सेवन से उसे अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।
9. जिनकी आँखें प्रायः लाल रहती हैं उनके भी मकोय का फल बहुत लाभकारी है।
10. जिन लोगों को कब्ज और गैस बनने की समस्या है उनके लिए मकोय की साग और मकोय का फल अचूक औषधि है।
11. मकोय का साग पेट के कीड़ों को भी मारता है।
12. बवासीर के रोगियों के लिए मकोय का साग, उसका फल और उसका पंचांग बहुत लाभदायक है। वे यदि इसका सेवन करते हैं तो बवासीर की समस्या न केवल नियंत्रण में रहेगी अपितु उस समस्या से मुक्ति भी मिल सकती है।


13. किसी भी प्रकार की सूजन में मकोय बहुत हितकारी है इसलिये गठिया के रोगियों के लिये तथा थायरॉइड आदि समस्या से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए यह बहुत लाभदायक है।


14. जिन लोगों का व्यायाम के बाद भी वजन नियंत्रित नहीं रहती तथा अनावश्यक रूप से पेट में भारीपन रहता है। उनके लिये इसके फल का सेवन यह बहुत ही कारगर है।


मकोय का पौधा कहीं भी उग आता है। खेतों, खलिहानों, दीवार के सहादे, सड़क के किनारे, खाली भूमि पर। अतः इसको सरलता से पाया और पहचाना जा सकता है। इसके सेवन से किसी भी प्रकार की हानि नहीं है क्योंकि यह वात-पित्त – कफ तीनों दोषों को ठीक करने वाला रसायन है।

आयुर्वेद में चमत्कारिक औषधियों को रसायन कहा जाता है। जैसे आँवला एक रसायन है। मकोय सहज उपलब्ध अत्यंत गुणवान पौधा है। यह बहुत लाभकारी है। सभी आयुवर्ग के व्यक्ति इसके फलों का निःसंकोच सेवन कर सकते हैं। इसके पत्तों की शाक खाना भी उत्तम है।

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