परवल खायें – यूरिक एसिड से मुक्ति पायें

हमारे शरीर में अम्ल और क्षार के मध्य संतुलन होना स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक होता है। अम्ल और क्षार में असंतुलन ही अधिकांश रोगों का कारण है।

दिनचर्या में परिवर्तन, गलत खान-पान तथा उचित व्यायाम न करने से शरीर में अम्ल और क्षार में असंतुलन हो जाता है । जिसके कारण शरीर में स्थान-स्थान पर पीड़ा से लेकर हड्डियों, जोड़ों में भयंकर दर्द तथा गठिया आदि होने की संभावना रहती है।

शरीर में अम्ल-क्षार के असंतुलन में अम्ल बढ़ जाता है और वही यूरिक एसिड के रूप में सन्धियों में धीरे-धीरे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है।

यूरिक एसिड बढ़ने का कारण

  • यूरिक एसिड बढ़ने का सबसे बड़ा और सामान्य कारण अनियमित दिनचर्या और अमर्यादित खानपान है।
  • प्रोटीन शरीर के लिये आवश्यक है परन्तु आवश्यकता से अधिक प्रोटीन का सेवन तथा उसका पाचन न हो पाना भी यूरिक एसिड बढ़ने का कारण है।
  • आहार में लिये गये कैलोरी की अपेक्षा कम परिश्रम करना भी एक कारण है।
  • किसी अस्वस्थता में ली हुयी कुछ दवाओं के कारण भी कभी-कभी यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
  • समय पर भोजन न करना तथा लम्बे समय तक पेट खाली रहना उसके बाद जमकर भोजन करना भी यूरिक एसिड बढ़ने का कारण है।

कैसे जानें की यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है?

  • प्रातःकाल बिस्तर से सोकर उठने पर जमीन में पैर रखने से यदि एड़ियों में किसी प्रकार का दर्द या सुई चुभने जैसा अनुभव हो तो प्रबल संभावना है कि आपके शरीर में अम्लीयता बढ़ रही है। यूरिक एसिड बढ़ रहा है।
  • शरीर के विभिन्न भागों विशेषकर जोड़ों में बिना किसी ठोस कारण के सूजन हो तो भी यूरिक एसिड बढ़ा है ऐसी संभावना है।
  • जोड़ों में विशेषकर घुटनों में दर्द भी यूरिक एसिड बढ़े होने का लक्षण है।
  • यूरिक एसिड के टेस्ट के द्वारा यह आसानी से पता चल जाता है कि यूरिक एसिड बढ़ा है कि नहीं।

यूरिक एसिड में परवल

बढ़े हुये यूरिक एसिड से मुक्ति तथा शरीर में अम्ल-क्षार में संतुलन हेतु परवल बहुत उपयोगी है। जिस प्रकार आँवला और हरीतकी अपने क्षारीयता के कारण विभिन्न रोगों के लिये रसायन है और शरीर को पुष्ट करने वाला है।

उसी तरह अपनी क्षारीयता के कारण परवल भी किसी रसायन से कम नहीं है। आयुर्वेद के ग्रंथों में परवल की भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी है तथा इसकी तुलना हरीतकी से की गयी है।

सब्जियों में परवल ही एक ऐसी सब्जी है जिसका प्रभाव क्षारीय है और अपने क्षारीयता द्वारा यह शरीर में अम्ल और क्षार के संतुलन को नियंत्रित और सुव्यवस्थित करने की क्षमता रखती है।

अष्टांगहृदयम् में परवल को हृदय के लिये हितकारक, कीड़ों को मारने वाला, पाचन में मधुर तथा भूख व भोजन की इच्छा बढ़ाने वाला बताया गया है ।

हृद्यं पटोलं कृमिनुत्स्वादुपाकं रुचिप्रदम्।

अष्टांगहृदयम्, सूत्रस्थानम्, अन्नस्वरूपविज्ञानीयाध्याय

आयुर्वेद के अनुसार परवल त्रिदोषनाशक है।

दोषत्रयहरं

भावप्रकाशनिघण्टु, शाकवर्ग, 72

परवल खाने से परवल अपना क्षारीय प्रभाव शरीर पर डालता है और उसे वात, पित्त, कफ तीनों दोषों का शमन होता है । इस प्रकार यूरिक एसिड नियंत्रण में भी लाभ मिलता है ।

परवल खाने की प्रभावी विधि

परवल सब्जी के रूप में प्रायः सभी घरों में खाया जाता है ।आलू-परवल, भरवा परवल तथा परवल की मिठाई आदि बनती है। इसप्रकार परवल हमारे दैनंदिन आहार में शामिल है।

परन्तु प्रायः यह देखा जाता है कि परवल की सब्जी बनाने में परवल को अधिक भून दिया जाता है। जिससे स्वाद तो बढ़ता है पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है । वह हमारे शरीर को उतना लाभ नहीं पहुँचा पाता।

अतः परवल का पूरा-पूरा लाभ शरीर को मिले इसके लिये आवश्यक है कि –

  • परवल को बहुत अधिक भूना या तला न जाय।
  • संभव हो तो उबालकर ही सेवन किया जाय।
  • परवल को भूनकर उसका भर्ता/चोखा बनाकर खाना बहुत लाभदायक होगा।

इस प्रकार सप्ताह में न्यूनतम तीन बार परवल का किसी न किसी रूप में सेवन करें तथा अधिक प्रोटीन वाले पदार्थों जैसे दाल आदि का सेवन कम कर दें। ऐसे में आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपको सकारात्मक परिणाम दिखने लगेगा।