चन्द्रप्रज्ञप्ति

‘चन्द्रप्रज्ञप्ति’ ज्योतिष का प्राकृत भाषा में लिखा रचा गया एक ग्रंथ है। यह ‘सूर्यप्रज्ञप्ति’ की अपेक्षा परिष्कृत ग्रंथ है। इसमें बताया गया है कि चन्द्रमा अपने स्वयं के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है इसके साथ ही इसमें चन्द्रकलाओं के घटने-बढ़ने के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसमें चन्द्रग्रहण का भी वर्णन प्राप्त होता है।

यह ग्रन्थ ‘प्राभृतों’ में विभाजित है अर्थात् अध्याय को’ प्राभृत’ नाम यहाँ दिया गया है। ग्रन्थ में कुल २० प्राभृत हैं।