कुल्फा: एक पोषक शाक

कुल्फा को लोणी या लोनी भी कहते हैं क्योंकि यह स्वाद में हल्का खट्टा व नमकीन होता है। वसन्त के बाद ग्रीष्मकाल में यह अपने आप सूखी, परित्यक्त भूमि पर उग आता है। खरबूजे के खेत में या ग्रीष्म ऋतु में होने वाली भिंडी आदि किसी भी शाक-सब्जी के खेत में अपने आप उग आता है। यह भूमि पर गोलाकर अर्थात् केन्द्र से बाहर की ओर फैला हुआ होता है। प्रायः इसका तना गुलाबी से लाल रंग और पत्तियाँ छोटी-छोटी व हरे रंग की होती हैं। पत्तियाँ पालक की तरह गूदेदार होती हैं। इस शाक में जल की मात्रा अधिक रहती है। इसकी शाक या चटनी बनाकर खा सकते हैं। इसका रस भी पिया जा सकता है। सलाद में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
👉इसका सेवन गर्मी के मौसम में बहुत उपयोगी है। इसके सेवन से शरीर में सोडियम व पानी की कमी नहीं होती।
👉मधुमेहग्रस्त लोगों के लिये इसका सेवन बहुत लाभकारी है।
👉विटामिन ए का प्रमुख स्रोत होने के कारण यह आँखों के लिये बहुत उपयोगी है। इसमें सभी शाकों की अपेक्षा विटामिन ए अधिक होता है।
👉इसमें ओमेगा 3भी पाया जाता है जो हृदय व मांसपेशियों के लिए अति महत्वपूर्ण तत्व है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
👉इसके सेवन से गठिया रोग में लाभ होता है तथा गठिया होने की सम्भावना कम होती है।