आयुर्वेद के अनुसार लौकी के लाभ (Benefits of Bottle Gourd (Cucurbita Lagenaria)

लौकी लगभग पूरे वर्ष उत्पन्न होने वाली हरी सब्जी है। आयुर्वेदग्रन्थों में लौकी का वर्णन ’शाकवर्ग’ के अन्तर्गत किया जाता है।

लौकी के विभिन्न नाम

  • संस्कृत-संस्कृत में लौकी को तुम्बी और अलाबू कहते हैं।– अलाबू कथिता तुम्बी द्विधा दीर्घा च वर्तुला।भावप्रकाशनिघण्टु, शाकवर्ग, 57
  • हिन्दी– लौकी, गोल लौकी, रामतरोऊई, दुद्धी, मीठी तुम्बी, घिया, लौआ
  • बांग्ला– लौ, कदु, कोडूलौ
  • मराठी-दुध्या, भोपला
  • गुजराती– दूधी, दुधियो, तुंबड़
  • पंजाबी– तुम्बा, घीया, केड्डी
  • तमिल-शोरक्काई
  • मलयालम– गाराडूडी, बेल्लाशोरा
  • कन्नड– सेरेबल्ली, उवलकाई, दूदी, डूडिओ, सोरेकाई
  • असमिया– बोगालाओ
  • नेपाली– लौका, तुम्बी
  • अंग्रेजी-Bottle Gourd, Calabash Gourd, White Flower Gourd
  • लैटिन Cucurbita Lagenaria

लौकी के फल का आकार-प्रकार

तुम्बी/अलाबू/ लौकी आकार में दो प्रकार की होती है। लम्बी लौकी और गोल लौकी-

अलाबू कथिता तुम्बी द्विधा दीर्घा च वर्तुला।

भावप्रकाशनिघण्टु, शाकवर्ग, 57

गोल लौकी लम्बी लौकी की ही भीँति स्वाद आदि में होती है परतु आकार गोल होता है कद्दू की तरह। लम्बी लौकी लम्बी होती है। दोनों के स्वाद में कोई विशेष अन्तर नहीं होता। लम्बी लौकी अधिक प्राप्त होती है। दोनों के बीज एक जैसे होते हैं। फूल , पत्ती, पौधा भी एक जैसा होता है। बस फलों का आकार भिन्ना होता है।
इसके अतिरिक्त तुम्बी/ लौकी का एक और प्रकार है जिसे कटु तुम्बी (कटु लौकी)कहते हैं।

लौकी का पौधा

लौकी का पौधा एक वस्तुतः एक लता है। जो किसी वृक्ष अथवा अन्य वस्तु का सकारा लेकर अपना प्रसार करता है तथा ऊपर चढ़ता है। लौकी की लतायें (बेल) अन्य लताओं जैसे कद्दू, तोरई जैसी ही होती हैं। लौकी का पौधा चारों ओर अपनी लता के अग्र भाग के प्रसार के साथ आगे बढ़ता है। इसमें फूल आते हैं। फल लगते हैं जो प्रायः नीचे की ओर लटकते रहते हैं।

लौकी का फूल

लौकी का फूल तोरई के फूल जैसा गोल आकार वाला होता है। यह फूल सफेद रंग का होता है। श्वेत पुष्प के कारण लौकी का पौधा दूर से पहचाना जा सकता है।
लौकी का तना- लौकी का तना अपेक्षाकृत चिकना, लचीला और मुलायम होता है। लौकी की बेल (तना)पर कद्दू की बेल की भाँति कठोर चुभनेवाले रोम नहीं होते अपितु लौकी की बेल के रोम बहुत कोमल और मखमली, मसृण होते हैं।

लौकी की पत्ती

लौकी की पत्ती क्लदू की पत्तियों जैसे गोलाकार होती हैं। और उनमें शिरायें निकली हुयी होती हैं। लौकी की पत्ती पर बहुत सूक्ष्म रोंये होते हैं जो लौकी की पत्ती को गद्दीदार एवम् स्पर्श में चिकना व कोमल बनाते हैं।

लौकी का फल

लौकी का फल अर्थात् जिसे लौकी के नाम से जाना जाता है लम्बा और गोल दो प्रकार का होता है। गोल फल अल्पवयकद्दू के आकार का होता है। खाये जा सकने वाली अवस्था में यह अधिकतम एक फुटबॉल के आकार का हो सकता है। लम्बी लौकी की परिपक्वावस्था मेंअधिकतम लम्बाई एक से डेढ़ मीटर तक हो सकती है। लौकी जब तक एक से डेढ़ फीट तक होती है तब तक वह खायी जा सकती है। कच्ची लौकी की ही सब्जी का सेवन किया जाता है। पकी लौकी किसी खाद्यपदार्थ के बनाने में कार्य में नहीं लायी जाती।
कद्दू का फल पकने पर सेवनयोग्य होता है तथा उसका संरक्षण भी किया जाता है। परन्तु लौकी का फल पहने पर सेवनयोग्य नहीं रह जाता । उसके अन्दर के सभी बीज पक जाते हैं तथा गूदा भी रसहीन, शुष्क व कठोर हो जाता है।
ऐसी लौकी जो पक गयी हो और जिसका ऊपरी आवरण कड़ा हो गया हो। उसे उसके पौधे में ही लगे-लगे सूखने देते हैं और तब तक उसे पौधे से अलग नहीं करते जब तक वह पूरी तरह सूख नहीं जाता। लौकी के इस सूखे फल को तोड़कर इसको ऊपर से काटकर इसे सामान रखने के काम में लाया जाता था। इस प्रकार पकी तुम्बी से पहले भिक्षापात्र तथा घर में उपयोग में लाने के लिये पात्र बनाये जाते थे। यह फलावरण इतना कठोर होता है कि इसमें से ठोस व द्रव किसी भी पदार्थ के बाहर निकलने का कोई सन्देह नहीं रहता।

लौकी का बीज

लौकी के फल का जब बाहरी आवरण कठोर हो जाता है तथा फल पककर सूख जाता है। तब उसे तोडकर उसमें ऊपर छेद करके अन्दर से लौकी के सभी बीज निकाल लेते हैं। लौकी के बीज 5-7 मिमी लम्बे 2-3 मिमी चौड़े तथा मटमैले ताँबई रंग के होते हैं। जिधर से बीजांकुर निकलता है उधर इनकी चौड़ाई कम होती है तथा दूसरी कोर थोड़ी सा अधिक होती है।
लौकी का फल लगते ही तीन-चार दिन में ही उसमें बीज का विकास होना प्रारम्भ हो जाता है। लौकी के कच्ची बीज सफेद रंग के होते हैं। लौकी का गूदा भी सफेद होता है। जैसे ही लौकी का बीज कड़ा होने लगता है वैसे ही सब्जी बनाते समय बीज निकालकर अलग करने की आवश्यकता होती है। सब्जी बीज निकालकर बनायी जाती है। परन्तु जैसे ही बीज और अधिक कड़ा होने लगता है तथा फल का बाह्य आवरण भी कड़ा होने लगता है। फल की गूदा भी शुष्क होने लगता है वैसे ही लौकी खाने योग्य नहीं रह जाती।

लौकी का तेल

लौकी के बीज को पेरकर तेल निकाला जाता है। जिसका प्रयोग अनेक रोगों के उपचार में किया जाता है। इसे ’लौकी के तेल’ के नाम से जाना जाता है। यह शीतल होता है। आजकल बाजार में सहजता से उपलब्ध है।

आयुर्वेद के ग्रन्थ भावप्रकाशनिघण्टु के अनुसार लौकी के औषधीय गुण

आयुर्वेद के ग्रन्थ भावप्रकाशनिघण्टु में लौकी के औषधीया गुणों का वर्णन है। वहा बताया गया है कि लौकी हृदय के लिये बहुत हितकारी होती है। लौकी पित्त तथा कफ आदि समस्याओं का नाश करने वाली हिती है। लौकी भारी तथा वीर्यवर्धक है। लौकी रुचिकारक है अर्थात् भूख को बढ़ाने वाली तथा धातु को पोषण प्रदान करने वाली है-

मिष्टीतुम्बीफलं हृद्यं पित्तश्लेष्मापहं गुरु।
वृष्यं रुचिकरं प्रोक्तं धातुपुष्टिविवर्द्धनम्॥58॥

भावप्रकाशनिघण्टु, शाकवर्ग, 58

आयुर्वेद के ग्रन्थ अष्टाङ्गहृदयम् के अनुसार लौकी के औषधीय गुण

अष्टाङ्गहृदय के अनुसार तुम्बी अर्थात् लौकी रुक्ष तथा मल को बाँधने वाली होती है। जब तक लौकी कम दिन की होती है। उसके रोम कोमल होते हैं तब तक वह पित्तनाशक होती है और शीतवीर्य होती है। शरीर को शीतलता प्रदान करती है। जब लौकी पह काती है। परिपक्व हो जाती है। तब लौकी पित्त को बढ़ाने वाली और ऊष्णवीर्य हो जाती है अर्थात् लौकी की तासीर गर्म हो जाती है-

तुम्बं रूक्षतरं ग्राहि कालिङ्गैर्वारुचिर्भटम्॥89॥
बालं पित्तहरं शीतं विद्यात्पक्वमतोऽन्यथा।

अष्टाङ्गहृदयम्, सूत्रस्थानम्, अन्नस्वरूपविज्ञानीयाध्याय, 89-90

इस प्रकार आयुर्वेद की दृष्टि मे लौकी स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक है। यह पित्त और कफ का नाश क्करती है अथा भूख को बढ़ाती है। भोजन के प्रति रुचि जगाती है।

लौकी के लाभ और घरेलू नुस्खे-

  • लौकी का सेवन हृदयरोग में बहुत लाभप्रद है। यह रक्त में शर्करा और वसा के स्तर को कम करता है तथा ट्राईग्लिसराईड को नियंत्रित करता है। पेट के रोगों में लौकी बहुत लाभकारी है। लौकी क्षारीय होती है। अतः जिनको भी पेटदर्द, कब्ज अथवा वायुरोग/ गैस बनने के समस्या है उन सभी के लिये नियमित लौकी का सेवन बहुत लाभकारी है। लौकी के नियमित सेवन से ये समस्यायें जड़ से दूर हो जाती हैं।
  • लौकी शीतल प्रकृति की होती है अतः बहुत अधिक गर्मी के कारण बार-बार लगने वाली प्यास ओ यह नियन्त्रित करती है।
  • बवासीर के रोगियों को भी लौकी के सेवन से आराम मिलता है।
  • अनेक लोगों को पैर के तलवे में जलन की समस्या होती है। गर्मी में यह समस्या असह्य हो जाती है। ऐसे में लौकी के गूदे को तलवे में लगाने से लाभ मिलता है।
  • खाज-खुजली और जलन में भी लौकी का गूदा और रस लाभकारी होता है। लौकी का तेल भी इसमें लाभ पहुँचाता है।

लौकी के तेल के लाभ

  • लौकी का तेल सिर में लगाने से बाल झअने की समस्या दूर होती है तथा झड़ गये बालों के स्थान पर पुनः नये बाल उग आते हैं। बालों के पहने, असमय सफेद होने की समस्या में भी लौकी का तेल सहायक है। लौकी का तेल लगाने से बाल काले रहते हैं।
  • लौकी का तेल शीतल होने के कारण सिरदर्द में भी उपयोगी है। इसके उपयोगसे सिरदर्द दूर होता है।
  • अनिद्रा में भी लौकी का तेल उपयोगी है। लौकी का तेल सिर में लगाकर सोने से अच्छी नींद आती है तथा व्यक्ति तनावमुक्त होता है।
  • लौकी का तेल लगाने से स्मरणशक्ति का विकास होता है तथा सिर ठण्डा रहता है।
  • जिन्हें किसी प्रकार का सिरदर्द अथवा माइग्रेन है उन्हें लौकी के तेल से बहुत आराम मिलता है। लौकी के तेल को लगातार लगाने से माइग्रेन की समस्या दूर होती है।
  • लौकी का तेल रेचक का आर्य करता है अतः कब्ज की अवस्था में इसका सेवन मलत्याग को आसान बनाता है तथा पाचन संस्थान को सुदृढ़ करता है।

लौकी से बनाये जाने वाले व्यञ्जन

  • शाकाहारियों के भोजन में लौकी प्रधानरूप से सम्मिलित होती है। लौकी के विभिन्न व्यंजन बनाये जाते हैं-
  • लौकी को जीरा और घी में छौंककर सादी सब्जी बनायी जाती है जो स्वाद में मधुर होती है तथा स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभकर होती है।
  • लौकी के गूदे का हलवा बनाया जाता है। लौकी के गूदे को चीनी के पाक में मिलाकर मिठाई भी बनायी जाती है।
  • लौकी का रायता लौकी से बनाये जाने वाले व्यञ्जनों में बहुत महत्त्वपूर्ण है। लौकी को घी, तेल आदि में छुंकर दही में मिलाकर रायता बनाया जाता है।
  • लौकी की पकौड़ी (बरिया)भी बनायी जाती है। इसके लिये लौकी को गोल-गोल काटक्र उसे बेसन में अथवा चावल भिगोकर पीसकर उसके पीठे में लपेटकर तला जाता है। इससे कुरकुरी व स्वादिष्ट पकौड़ियाँ बनती हैं।
  • लौकी को चने व अरहर की दाल में मिलाकर ’ लौकी-दाल’ भी बनायी जाती है। जो बहुत पौष्टिक व स्वादिष्ट होती है।
  • लौकी का कोफ्ता भी बनाया जाता है।

इसप्रकार लौकी का विभिन्न रूपों में प्रयोग किया जाता है। यह हमारे भोजन का एक महत्वपूर्ण घटक है होने के साथ-साथ बहुत पौष्टिक भी है।