अशोक के प्रमुख शिलालेख एवं उनमें वर्णित विषय

अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बांटा जा सकता है –
1- शिलालेख
2-स्तंभलेख
3-गुहालेख।
अशोक के शिलालेखों संख्या- 14 है।

शिलालेख

पहला – इसमें पशुबलि की निंदा की गई।
दूसरा – मनुष्य व पशु दोनों की चिकित्सा – व्यवस्था का उल्लेख है।
तीसरा – इसमें राजकीय अधिकारियों को यह आदेश दिया गया है कि वे हर पाँचवे वर्ष के उपरांत दौर पर जाएं। इसमें कुछ धार्मिक नियमों का भी उल्लेख है।


चौथा – उसमें भेरीघोष की जगह धम्मघोष की घोषणा की गई।
पाँचवा – इसमें धर्म महापात्रो की नियुक्ति की जानकारी मिलती है।
छठा- इसमें आत्म-नियंत्रण की शिक्षा दी गई है।
सातवाँ व आठवां – इसमें अशोक के तीर्थ-यात्राओं का उल्लेख है।
नौवांँ – इसमें सच्ची भेंट और सच्चे शिष्टाचार का उल्लेख है।
दसवांँ- इसमें अशोक ने आदेश दिया है कि राजा तथा उच्च अधिकारी हमेशा प्रजा के हित में सोचें।
ग्यारहवांँ – इसमें धम्म की व्याख्या की गयी है।
बारहवाँ – इसमें स्त्री महापात्रों की नियुक्ति एवं सभी प्रकार के विचारों के सम्मान की बात कही गयी है।


तेरहवांँ – इसमें कलिंग युद्ध का वर्णन एवं अशोक के हृदय परिवर्तन की बात कही गयी है। इसी में पांच यवन राजाओं के नामों का उल्लेख है, जहां उसने धम्म प्रचारक भेजे।
चौदहवांँ – अशोक ने जनता को धार्मिक जीवन बिताने के लिए प्रेरित किया।।

अशोक के अभिलेखों की संख्या सात है, जो केवल ब्राह्मी लिपि में लिखी गई है। यह छह अलग – अलग स्थानों से प्राप्त होती है।
1- प्रयाग स्तंभ- लेख – यह पहले कौशांबी में स्थित था। इस स्तंभ – लेख को अक़बर ने इलाहाबाद के किले में स्थापित कराया।
2- दिल्ली – टोपरा – यह स्तंभ लेख फिरोजशाह तुगलक के द्वारा टोपरा से दिल्ली लाया गया।
3- दिल्ली – मेरठ – पहले मेरठ में स्थित यह स्तम्भ – लेख फिरोजशाह द्वारा दिल्ली लाया गया।
4- रामपुरवा – यह स्तंभ – लेख चंपारण (बिहार) में स्थापित है। इसकी खोज 1872 ई. में कारलायल ने की।
5- लौरिया अरेराज – चंपारण (बिहार) में।
6- लौरिया नंदनगढ़ – चंपारण (बिहार) में इस स्तंभ पर मोर का चित्र बना है।
कौशांबी अभिलेख को ” रानी का अभिलेख” कहा जाता है।
अशोक का सातवाँ अभिलेख सबसे लंबा है। अशोक का सबसे छोटा स्तंभ लेख रुम्मिनदेई है।