अकबर के काल में अनूदित महाभारत/रज़्मनामा

मुगल शासनकाल

में अनेक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया। इसी क्रम में एक सहस्र श्लोकों वाले शतसाहस्री संहिता महाभारत का भी फारसी में ‘रज़्मनामा‘ नाम से अनुवाद हुआ।

महाभारत के अनुवाद के बाद जब अकबर के पास अनूदित पुस्तक ले जायी गयी तब उन्होंने इसका नाम ‘रज़्मनामा’ रखा। ‘रज़्मनामा’ का शाब्दिक अर्थ है युद्ध की पुस्तक। महाभारत का यह अनुवाद 1584 ईस्वी से 1586ईस्वी तक हुआ। यह अनुवाद कार्य भी रामायण की भाँति फतेहपुर सीकरी स्थिति मकतबखाना (पुस्तकालय) में ही सम्पन्न हुआ।

इस अनुवाद में चित्रकार मुशफ़ीक, दशवन्त, वसावन्त (बसावन) और लाल ने चित्र बनाये थे। इसकी अनेक प्रतियाँ लिखवायी गयीं थीं जिनमें से एक प्रति जयपुर के संग्रहालय में संरक्षित है।

इस रज़्मनामा के चार खंड हैं। अंतिम खंड में भगवान् कृष्ण की जीवनी ‘हरिवंश’ दी गयी है। इसमें कुल 168 चित्र हैं। इस अनुवाद के अंतिम पृष्ठ पर अकबर, शाहजहाँ एवं शाहआलम के सिक्के लगे हुये हैं। तथा इस अनुवाद का मूल्य 4024 अकबर रुपये लिखा है।

इस अनुवाद के कुछ चित्रों पर हिजरी वर्ष 993-994 (1585ईस्वी-1586ईस्वी)लिखा है। इसमें कुछ ऐसे भी चित्र हैं जो दो पृष्ठों पर बनकर पूरे हुये हैं। सभी चित्रों में महाभारत के प्रसंगों का चित्रण है तथा रामायण की भाँति ही इन चित्रों को दो कलाकारों ने मिलकर तैयार किया है।

जयपुर में संरक्षित इस रज़्मनामा के चित्रों के कुछ विषय:-

आदिपर्व:-

कौरवों सौ भाईयों की पाण्डवों से भेंट, धृतराष्ट्र द्वारा कुन्ती तथा पाण्डवों का हस्तिनापुर में स्वागत, भीम द्वारा वृक्षों को हिलाकर कौरवों को डरवाना (चित्रकार तुलसी और मणि), अर्जुन द्वारा द्रोण की मगरमच्छ से रक्षा (चित्रकार:लाल एवं साँवला), लाक्षागृह दाह (चित्रकार:लाल और माधव), हिडिंब वध (चित्रकार : लाल एवं मुखलीस), अर्जुन द्वारा लक्ष्यभेद (चित्रकार:दशवंत एवं केशु)

अकबर के ही शासनकाल में 1599 ईस्वी में महाभारत का एक और अनुवाद हुआ। इस अनुवाद हेतु अकबर ने नाकीब खान, हाजी थानेश्वरी, मुल्ला शेरी, अब्दुल कादिर बदायुंनी तथा फैजी को चुना था। प्रस्तावना लेखन हेतु तत्कालिक प्रसिद्ध विद्वान् अबुल फजल का चयन हुआ था। इस अनुवाद में अनुवाद प्रक्रिया का एक चित्र प्राप्त होता है। इसमें संस्कृत एवं फारसी अनुवादक का चित्रण है और इसे चित्रकार धन्नू ने बनाया है।

यह सचित्र अनुसार चार वर्ष के परिश्रम से तैयार किया गया।इस अनुवाद में 200 चित्र थे। इसकी प्रति बड़ोदरा संग्रहालय, ब्रिटिश लाइब्रेरी, लंदन एवं अन्य संग्रहालयों में सुरक्षित है।

अब्दुल रहीम खानखाना ने अपने लिये सन 1616-1617ईस्वी में रज्म़नामा की एक प्रति लिखवायी थी। इसमें 70 चित्र थे। हरिवंश का भी पुनर्लेखन हुआ था उसमें 30 चित्र थे। ये प्रति विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम, लंदन, मेट्रोपोलिटन म्यूजियम आॅफ आर्ट, न्यूयॉर्क एवं अन्य संग्रहालयों में सुरक्षित है।

इस प्रकार अकबर के शासनकाल में संस्कृत के दोनों प्रशस्त महाकाव्यों रामायण एवं महाभारत का फारसी भाषा में अनुवाद सम्पन्न हुआ। ये अनुवाद चित्रयुक्त है।इसके चित्र मुगल शैली में बने हुये हैं। मुगल शैली भारतीय और फारसी शैली का सम्मिश्रण है। रज्म़नामा आज एक धरोहर है।

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