अंगूर – Grapes स्वास्थ्य के लिए उत्तम फल

अंगूर(द्राक्षा/दाख/Grapes) से हम सभी परिचित हैं। आज हम यह जानेंगे कि अंगूर के विषय में आयुर्वेद क्या कहता है? और यह स्वास्थ्य के लिये किस प्रकार लाभकारी है?


अंगूर एक फल है। आयुर्वेद में इसकी गणना ‘फलवर्ग’ के अन्तर्गत होती है। अष्टांगहृदयम् में द्राक्षा अर्थात् अंगूर को फलों में उत्तम कहा गया है।

इसे वीर्यवर्धक, आँखों के लिये हितकारी और रेचक अर्थात् मल-मूत्र का सम्यक् निष्कासन करने वाला बताया गया है।

यह स्वादिष्ट है, मधुर है, कुछ कषाय अर्थात् कसैला भी है, ठंडी प्रकृति का है तथा देर में पचने वाला है। यह त्रिदोष – वात, पित्त, कफ नाशक है। साथ ही यह रक्त के विकारों को भी दूर करने वाला है।

यह प्यास, खाँसी, थकावट, साँस फूलने, कंठ खराब होने में यह उपयोगी है। यह क्षयरोग अर्थात् टीबी (tuberculosis) का विनाश भी करता है –

द्राक्षा फलोत्तमा वृष्या चक्षुष्या सृष्टमूत्रविट्।।
स्वादुपाकरसा स्निग्धा सकषाया हिमा गुरुः।
निहन्त्यनिलपित्तास्रतिक्तास्यत्वमदात्ययान्।।
तृष्णाकासश्रमश्वासस्वरभेदक्षतक्षयान्।-अष्टांगहृदयम्, सूत्रस्थानम्

अब आइये जानते हैं अंगूर के विभिन्न स्वास्थ्य – लाभ-

👉जिनको खुलकर भूख नहीं लगती उनके लिए अंगूर का सेवन हितकर है। अंगूर खाने से उदर-संस्थान ठीक से काम करता है और खुलकर भूख लगती है।

👉जिनको कब्ज की समस्या रहती है उनके लिए भी अंगूर खाना लाभकारी है क्योंकि यह कब्ज दूरकर पेट साफ करता है तथा पाचन शक्ति ठीक करता है।

रक्ताल्पता अर्थात् खून की कमी दूर करने में अंगूर का अचूक प्रयोग है। अंगूर खाने से तेजी से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।

शरीर के विषाक्त तत्वों को मूत्रमार्ग से शीघ्रता से निकालने में अंगूर बहुत कारगर है।

अंगूर में ऐसे पोषण तत्व हैं जो सम्पूर्ण पोषण के लिये उत्तरदायी हैं अतः अंगूर के मौसम में भरपूर अंगूर खाने से मल्टीविटामिन लेने की आवश्यकता नहीं रह जाती।

 यदि आप किडनी या पित्त की थैली में पथरी से पीड़ित हैं तो अंगूर खाने से पथरी का आकार बढ़ने नहीं पाता। किडनी की पथरी का आकार कम होते हुये भी देखा गया है।

 यदि आप कोई शल्यचिकित्सा अर्थात् आॅपरेशन करवाने वाले हैं तो उससे पहले अंगूर के मौसम में भरपूर अंगूर का सेवन कीजिये। आॅपरेशन में आपको अलग से खून चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और न ही किसी पोषक तत्व की कमी के चलते बार-बार आॅपरेशन का समय आगे बढ़ेगा।

अंगूर घाव भरने में भी सहायक है। अतः यदि आपको कहीं चोट लगी है या आॅपरेशन आदि हुआ है तो अंगूर का सेवन करें।

अंगूर तनाव दूर करता है और आँखों को आराम पहुँचाता है। यह नेत्र-ज्योति के लिये भी उत्तम है।

अंगूर खाने से सिरदर्द, माइग्रेन, अवसाद अर्थात् डिप्रेशन में राहत मिलती है और नींद भी अच्छी आती है। इसलिये व्यक्ति का मस्तिष्क शान्त रहता है।

मिर्गी आदि रोगों में भी अंगूर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

बढ़ती उम्र के साथ होने वाली भूलने की बीमारी में भी इससे राहत मिलती है तथा अंगूर का निरन्तर सेवन करने से भूलने की बीमारी होने का खतरा कम होता है।

अंगूर त्वचा विकारों में भी लाभकारी है। गर्मी में सूर्य का जो नकारात्मक प्रभाव त्वचा पर पड़ता है, अंगूर का सेवन उस प्रभाव को कम करने में उपयोगी है।

यह तीनों दोषों को समाप्त करने वाला है अर्थात् शरीर में यदि वात, पित्त, कफ किसी भी कारण से कोई समस्या है, तो अंगूर उसे दूर करके शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है।

अंगूर मस्तिष्क की कोशिकाओं को विश्राम देने के साथ-साथ स्फूर्ति भी देता है। जिससे धारणा शक्ति अर्थात् याददाश्त बढ़ती है।

अंगूर के सेवन से मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है।

अंगूर के सेवन से वर्ष भर व्यक्ति का गुर्दा अर्थात् किडनी स्वस्थ रहती है।

अंगूर खाने से बढ़ा हुआ यूरिक एसिड कम होता है। यूरिक एसिड ही गठिया और जोड़ों के दर्द का कारण है। अतः यूरिक एसिड कम होने से गठिया और किसी भी प्रकार के जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

अंगूर फेफड़ों को मजबूत करता है इसलिए अस्थमा जैसी बीमारियाँ भी इससे दूर होती हैं।

अंगूर में विटामिन सी और के भरपूर पाया जाता है अतः यह रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का उत्तम माध्यम है।

अंगूर का सेवन मूत्राशय और मूत्रत्याग में होने वाली जलन समाप्त करता है। जिनको UTI अर्थात् यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन है या जो समय-समय पर इससे पीड़ित रहते हैं, उन्हें अंगूर खाने से बहुत लाभ मिलता है।

Categories: आयुर्वेद एवं घरेलू उपचार

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