परवल खायें – यूरिक एसिड से मुक्ति पायें

हमारे शरीर में अम्ल और क्षार के मध्य संतुलन होना स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक होता है। अम्ल और क्षार में असंतुलन ही अधिकांश रोगों का कारण है। दिनचर्या में परिवर्तन, गलत खान-पान तथा उचित व्यायाम न करने से शरीर में अम्ल और क्षार में असंतुलन हो जाता है । जिसके कारण शरीर में स्थान-स्थान… Read More परवल खायें – यूरिक एसिड से मुक्ति पायें

टाॅप 10 डेली करेंट अफेयर्स

टाॅप 10 डेली करेंट अफेयर्स 22 मई अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है – 22 मई नाबार्ड के अध्यक्ष नियुक्त किया गया है – लिंक गोविंदा राजुलु चिंटला रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट में कितने प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है – 0.4 प्रतिशत  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रिवर्स रेपो… Read More टाॅप 10 डेली करेंट अफेयर्स

पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

नहि तद्विद्यते किञ्चिद्यदर्थेन न सिद्धयति। यत्नेन मतिमांस्तस्मादर्थमेकं प्रसाधयेत्।। पञ्चतन्त्र, मित्रभेद, 2 इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक धन का ही उपार्जन करना चाहिए । धन से ही समस्त वैभव और इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति हो सकती है… Read More पञ्चतन्त्र की सूक्तियाँ : धनविषयक

आयुर्वेद में धान

आयुर्वेद में धान्यवर्ग के अन्तर्गत धान का वर्णन मिलता है जहाँ इसे शालि और व्रीहि दो कोटियों में रखा गया है। धान्यवर्ग में धान्य के शालिधान्य, व्रीहिधान्य, शूकधान्य, शिम्बीधान्य और क्षुद्रधान्य ये पाँच भेद किये गये हैं। शालिधान्यं व्रीहिधान्यं शूकधान्यं तृतीयकम्। शिम्बीधान्यं क्षुद्रधान्यमित्युक्तं धान्यपंचकम्॥१॥ भावप्रकाशनिघण्टु, धान्यवर्ग इसमें से लालरंग के चावलों को शालि धान्य कहते… Read More आयुर्वेद में धान

धान का सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष

धान से तैयार चावल, भात, लाई/मूरी, चिउड़ा/पापड़ आदि अनेक वस्तुयें दैनंदिन जीवन में भोजन-जलपान हेतु प्रयुक्त होती हैं। भारतीय संस्कृति में धान धान का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्त्व है। धान प्राचीन काल से ही बहुत विशिष्ट अन्न के रूप में प्रसिद्ध है। अक्षत किसी भी शुभ कार्य में अक्षत का प्रयोग होता है, जो… Read More धान का सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष

आम्र/आम के लाभ

आम को फलों का राजा कहा जाता है। आम स्वयं में सम्पूर्ण आहार है। आम का पत्ता, आम की मंजरी, कच्चा आम, पका आम से लेकर आम की गुठली और कच्चा आम दाल में उबालकर खाने के बाद उसकी बची गुठली तक खाने के काम आती है और औषधीय गुणों से भरपूर है। विभिन्न प्रकार… Read More आम्र/आम के लाभ

अनुमान प्रमाण

अनुमान न्याय-वैशेषिक का दूसरा प्रमाण है। भारतीय दर्शन की प्रमाणमीमांसा में अनुमान का महत्वपूर्ण स्थान है। अनुमिति का करण अनुमान है। अर्थात् अनुमान अनुमिति का साधन है। अनुमितिकरणमनुमानम् अब प्रश्न उठता है कि अनुमिति क्या है? परामर्श से उत्पन्न होने वाला ज्ञान अनुमिति है। परामर्शजन्यं ज्ञानमनुमितिः। अब प्रश्न उठता है कि ‘परामर्श’ क्या है? ‘परामर्श’… Read More अनुमान प्रमाण

प्रत्यक्ष प्रमाण

प्रत्यक्ष वह ज्ञान है जो इन्द्रिय और विषय अथवा पदार्थ के सन्निकर्ष अर्थात् संयोग से उत्पन्न होता है। प्रत्यक्ष ज्ञान का करण (साधन) प्रत्यक्ष है। वह दो प्रकार का होता है- निर्विकल्पक (प्रत्यक्ष), सविकल्पक (प्रत्यक्ष) तत्र प्रत्यक्षज्ञानकरणं प्रत्यक्षम्। इन्द्रियार्थसन्निकर्षजन्यं ज्ञानं प्रत्यक्षम्। तद् द्विविधम्- निर्विकल्पकं सविकल्पकं चेति। निर्विकल्पक प्रत्यक्ष वस्तु का केवल स्वरूप ग्रहण करने वाला… Read More प्रत्यक्ष प्रमाण

न्याय-वैशेषिक में प्रमा

न्याय-वैशेषिक के ज्ञानमीमांसा की समस्त प्रक्रिया प्रमा (ज्ञान) पर ही आधारित है अतः प्रमा को विधिवत् जान लेना परमावश्यक है। ज्ञान किसी विषय का ही होता है। बिना किसी विषय के ज्ञान संभव नहीं । पदार्थ का पहला धर्म ही है अस्तित्व। ज्ञान में प्रकट होने वाले विषय तीन प्रकार के हैं-धर्म अर्थात् विशेषण, धर्मी… Read More न्याय-वैशेषिक में प्रमा

न्याय-वैशेषिक में बुद्धि (ज्ञान) का स्वरूप

वैशेषिक दर्शन में सात पदार्थ हैं-द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय एवं अभाव। तत्र द्रव्यगुणकर्मसामान्यविशेषसमवायाभावाः सप्त पदार्थाः। इन सात पदार्थों में दूसरा पदार्थ है-गुण । गुण चौबीस है- रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्व, अपरत्व, गुरुत्व, द्रवत्व, स्नेह, शब्द, बुद्धि, सुख, दुःख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, धर्म, अधर्म और संस्कार। रूपरसगन्धस्पर्शसंख्यापरिमाणपृथक्त्वसंयोग- विभागपरत्वापरत्वगुरुत्वद्रवत्वस्नेहशब्द-… Read More न्याय-वैशेषिक में बुद्धि (ज्ञान) का स्वरूप